भ्रष्टाचार बोले तो..बिगड़ा हुआ आचरण, भाई-भतिजावाद भी मुख्य केंद्र.!
न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरूद्ध स्वार्थ की पूर्ति के लिए गलत आचरण करने वाले भ्रष्टाचारी कहलाते हैं। जहां एक ओर आर्थिक, सामाजिक या सम्मान, पद -प्रतिष्ठा की त्वरित प्राप्ति हेतु व्यक्ति अपने आपको भ्रष्ट बना लेता है, वहीं दूसरी ओर हीनता और ईर्ष्या की भावना से दुखीत व्यक्ति भ्रष्टाचार को अपनाने के लिए…
