‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक, बरसाते थे सामाजिक कार्य, ‘बभनौटी’ में श्रद्धांजलि देकर, करीबी ‘प्रेम शंकर’ को कर रहे याद…
इस जिंदगी में एक मार्मिक गाथा होती है, जो जीवन पर्यंत अपने लिए आप रचते हैं. फिर उक्त यादें छोड़कर इस धरा से विदा ले लेते हैं. बहुत कम लोग होते हैं जो पुश्तैनी गांव (जन्मभूमि) या करीबी लोगों के लिए कुछ ‘कर्मभूमि’ रहकर कर पाते हैं. फिलहाल भदोही जनपद के बभनौटी में ‘प्रेम शंकर’…


