सुनील तिवारी

सशक्त समाज न्यूज' नेटवर्क समूह की विभिन्न इकाइयों में इस 'न्यूज पोर्टल' का भी समावेश है। वरिष्ठ व अनुभवी पत्रकारों की टीम यहां पर धार्मिक-सांस्कृतिक, सामाजिक-राजनैतिक खबरें प्रस्तुत करती है। 'कर्मभूमि' मुंबई व 'जन्मभूमि' उत्तर प्रदेश के विभिन्न 'जनहित' मुद्दों को उठाने हेतु हम वचनवद्ध हैं। खबरें व प्रतिक्रिया सिर्फ sashaktsamaaj@gmail.com पर EMAIL कीजिये...

‘साकेत ग्रुप’ के ‘प्रोजेक्ट’ पर लग सकता है ‘ग्रहण’, जानिए ‘अनशन’ का ‘माजरा’…

कल्याण-डोंबीवली के आसपास क्षेत्रों में ‘साकेत ग्रुप’ एक सुप्रसिद्ध नाम है, जिसे शैक्षणिक संस्थान के साथ गगनचुंबी बिल्डिंगों को खड़ी करने में भी महारत् हांसिल है. फिलहाल कल्याण (पूर्व) में ऐसा ही एक प्रोजेक्ट अनशन का केंद्र बन चुका है, यहां विवेक पांडेय नामक युवा अनशन पर बैठा है. उक्त युवा जहां ‘साकेत ग्रुप’ व…

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सशक्त BREAKING – 41 कर्मचारी मिले लापता, ‘डीएम साहब’ भी चले गए.!!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सशक्त आदेश है कि कर्मचारी समय से कार्यालय में पहुंचे, जहां पहुंचकर पीड़ितों की फरियाद पर न्यायसंगत मामलों को निस्तारित करें. यह आदेश जनपद स्तर पर अमल में लाने के लिए डीएम-एसपी सहित बड़े-बड़े अधिकारी भले ही जुटे हैं लेकिन जनता के सेवक शासनिक कर्मचारी हैं कि मानते…

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‘गिरगिट’ छिपे ‘वोटों की आड़’, निकलेगें मेरे यार, आरक्षण की तकरार, अबकी फिर परधानी में….

गांव क पंचाईत यांनी परधानी…जवने पर बड़े-बड़े की नजर टिकी रहअ थ. आखिर नजर टिके भी काहे न…गांव के विकास के लिए करोड़ों रूपए और पद-प्रतिष्ठा का यह अव्वल शोरूम है. अब इस शोरूम की चाभी कवन नहीं लेना चाहेगा..? शोरूम के अंदर ही तो करोड़ोंरूपी विकास की तिजोरी होती है. खैर..हमरे उत्तर प्रदेश में…

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पढ़िए….विशेष ‘मार्मिक’ धारावाहिक – “आइजीआरएस (01)” – यूपी में ‘भदोही जनपद पुलिस’ टाॅप पर.!!

यूपी में online सुशासन और शासनिक-प्रशासनिक कर्तव्यनिष्ठा को प्रमाणित करने के लिए “आइजीआरएस पोर्टल” की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जहां पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की रैंकिंग में कई जिला टाॅप के इर्द-गिर्द भटकते रहते हैं, वहीं भदोही जनपद ने सूबे में अव्वलता हांसिल किया है। गौरतलब है कि बीते वर्ष के आखिरी महीनें…

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तहसीलदार ने दिखाई ऐसी झलक, बड़े-बड़े किसान खुशमय, काटनें लगे तहसील का चक्कर.!!

तहसीलदार का नाम सुनते ही कुछ किसानों के चेहरों पर मायूसी छाॅ जाती है क्योंकि उनके जमीन-जायदाद के मसलों में उन्हें मनमाफिक न्याय के लिए तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है. वैसे पूर्वजों-बुजुर्गों ने भी नसीहत दे रखी है कि तहसील या पुलिस थाना के चक्कर में जो ना फंसे, मानों वही सुखी इंसान है….

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