गांव क पंचाईत यांनी परधानी…जवने पर बड़े-बड़े की नजर टिकी रहअ थ. आखिर नजर टिके भी काहे न…गांव के विकास के लिए करोड़ों रूपए और पद-प्रतिष्ठा का यह अव्वल शोरूम है. अब इस शोरूम की चाभी कवन नहीं लेना चाहेगा..? शोरूम के अंदर ही तो करोड़ोंरूपी विकास की तिजोरी होती है. खैर..हमरे उत्तर प्रदेश में त सीजन के हिसाब से खटमल, चूहा, मेढ़क इत्यादि सक्रिय हो जाते हैं…फिर ‘गिरगिटऊ‘ अपनी किस्मत ‘रंग बदलकर’ मौसम का ‘मजा’ क्यों ना ले..? कुछू ऐसी ही बहुबात पंचाईत चल रही थी, तब तक ‘पंडालाल’ पहुंच गए. गुनगुनाने लगे कि ‘गिरगिट छिपे वोटों की आड़, निकलेगें मेरे यार, आरक्षण की तकरार, अबकी फिर परधानी में….’ ई सुनतई माहौल बदली ग अऊर सब सोचे कि ‘पंडालाल’ भी’ ‘सामान्य सीट’ से परधानी की ताल ठोकेगें. कुछू बात आगे बढ़ती तब तक ‘मंगरूआ‘ बोल पड़ा कि “पंडालाल महराज क दुकानदौरी तेज बा…शोरूम क मैनेजर चाहे जे रहई लेकिन मंत्र से माल निकालई में माहिर हयेंनि. ऐहर बिचन जे आवता परधानी क आशिर्वाद लेता लेकिन अटकी सीट सामान्य-असामान्य यांनी आरक्षण क तकरार बतावत अऊर दक्षिणा वगैरह कम चढ़ता.” ऐतना सुनतई ‘पंडालाल महराज’ भड़की गयेंनि अऊर कहेंनि “मंत्र पढ़ब हमार धर्म हऊ अऊर सबके लिए दक्षिणा व स्वार्थ लाभ के हिसाब से पढ़ते हैं. अबई सीट क्लीयरेंस क लफड़ा बा लेकिन बभनौटी में कईऊ गिरगिट प्रत्याशी वोटों की आड़ में छिपे हैं, जे सामान्य सीट होतई परधानी में कूदीहईं…कई जनेके ‘दक्षिणा लेईके जीत भवन्तु’ आशिर्वाद देई दिहे हईअ. अब प्रभु सीट असामान्य कईअ देतेंनि त ठीक रहा…आरक्षण के प्रत्याशी के लिए जीत भवन्तु का मंत्र पढ़ता, आपन के त दक्षिणा से मतलब बा. जेतना हरियाली ओतना मंत्र अऊर लहीग त पांच साल विकास योजना के साथ रबड़ी-मलाई लेकिन सामान्य सीट पर गिरगिट छिपे वोटों की आड़, निकलेगें मेरे यार, आरक्षण की तकरार, अबकी फिर परधानी में….



