‘कलंक’ से बचने के लिये ‘सिर कलम’ करके, बेटी को ऐसे जा रहा था दफनाने..
हर समाज की अपनी एक पुश्तैनी व सांस्कृतिक परंपरा है, जिस पर हर कोई आधुनिकता की डगरी चलकर भी जुड़ा रहना चाहता है। कई बार यहां आधुनिकता की शिक्षा में पाश्चात्य प्रथा की ओर नवपीढ़ी कदम बढ़ा देती है। इश्क-मोहब्बत का जंजाल सामाजिक पंचाईत में ‘कलंकी’ बना देता है, जिस ‘कलंक’ से बचने के लिए…


