भदोही जनपद विकास हेतु ‘त्वरित विकास योजना’ के प्रस्तावित कार्यों का अनुमोदन आश्वासन बड़ी तत्परता से राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पूर्ण कर दिया, जिसके तहत १५ करोड़ में से भदोही एवम् औराई विधायक को ५-५ करोड़..विधायक नीधि, पुर्वांचल विकास नीधि नहीं, बल्कि अतिरिक्त बुनियादी क्षेत्र विकास हेतु समर्पित करने में कामयाबी हासिल हुई।
खैर..१० करोड़ के ‘त्वरित’ यांनि तत्काल विकास विकास कार्य को ‘भ्रष्टाचारी’ ग्रहण लगते देर नहीं लगी। इसकी सुगबुगाहट जैसे ही ‘सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क के हाथ लगी तो विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करते हुये भदोहीवासी विकास प्रिय युवाओं की गुहार पर ‘मातृभूमि मंथन’ निष्पक्ष धारावाहिक के माध्यम से योगी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों का अनुपालन किया गया। इस मामले में परत-दर-परत दर्जनों आश्चर्यजनक खोजी पिछले भागों में आप पढ़ चुके हैं। विधायक एवम् ठेकेदारों की सांठगांठ में भ्रष्टाचार के आरोपों की बयार भले ही बहती रही….लेकिन आखिरी पत्ता यांनि भ्रष्टाचारियों का मुख्य ‘मास्टर कार्ड’ एक शासनिक अभियंता है। यह रोचक तथ्य शायद ही भदोहीवासियों के जहंन में हो लेकिन अब वह भी जगजाहिर ही समझिये क्योंकि इस मामले की फाईल हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीशों द्वारा तलब की गई है। २ सितंबर मंगलवार को पुनः सुनवाई निर्धारित है। भ्रष्टाचार करने हेतु टेंडरिग प्रक्रिया में भी गंभीर साजिश के आरोप हैं। अब आप समझ ही चुके होंगे कि विधायक-ठेकेदार और शासनिक अधिकारी का खेल लेकिन विधायक-ठेकेदार के आलावा शासनिक स्तर पर भ्रष्टाचारियों का ‘मास्टरमाईंण्ड’ चाहे जो हो लेकिन ‘मास्टर कार्ड’ हैं केसी श्रीवास्तव। जी हां केसी श्रीवास्तव जो कि भदोही में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बतौर रूरल इंजीनियरिंग विभाग में पदस्थ हैं।
महीनों नहीं किये बात, फिर आई याद.!
अभियंता के. सी. श्रीवास्तव के मोबाइल नंबर 7054073008 पर लगातार १७ जुलाई से महीनों संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने काल उठाने या रिकाल की जहमत नहीं उठाई। अचानक 20 अगस्त को उन्होंने इस संवाददाता को काल करके कई मुद्दों अनौपचारिक बातचीत की और 21 अगस्त को 12 बजे अपने पक्ष में प्रतिक्रिया देने की बात कही। उन्हें विशेष सुविधा हो इसलिए पूर्व में प्रकाशित खबरें उन्हें भेजी गई लेकिन शायद यहीं चूक हो गई क्योंकि जनप्रतिनिधियों की विभिन्न प्रतिक्रिया से मामला पेचिदा पढ़कर वे शायद सहम से गये। सिर्फ ‘प्रस्तावित कार्य सुची’ एवम् कार्य स्थल भी मुहैया करवाने में असफल रहें। आरोपों से घिरे दर्जनों तथ्य पढ़कर उन्होंने कवन्नी काट लिया।
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(आखिरी भाग – ११, पुर्णाहूति – ऐसी पारदर्शिता हमनें ना देखी थी, धन्य-धन्य भदोही..)



