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हिन्दी भाषी नेता की भूमिका संदिग्ध, चर्चा जोरों पर…

कल्याण-डोंबीवली के साथ कई हिन्दी भाषी बाहुल्य सीटों पर भूमिपुत्र प्रत्याशियों के साथ कुछ स्वयंभू ‘हिन्दी भाषी’ नेताओं ने करारा विश्वासघात कर दिया है. ऐसी चर्चा हिन्दी भाषियों में धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है. यह मामला उच्च नेताओं तक पहूंचने से पार्टी कार्यालय में भी हड़कंप मचने की सुगबुगाहट है।

गौरतलब है कि कल्याण-डोंबीवली सहित ठाणे जिले की कुछ अन्य सीटों पर हिन्दी भाषी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है. जोकि कहीं आमदार चुनने में सक्षम है, तो कहीं निर्णायक रूप से बाजी पलटनें में. इसलिए इस चुनाव में पार्टी के हिन्दी भाषी नेता व समाजसेवी वर्ग की विशेष पूछ है. इसी का फायदा उठाकर पार्टी से जुड़े कुछ उत्तर भारतीय नेताओं के साथ कुछ ने समाजसेवी बनकर पार्टी के भूमिपुत्र प्रत्याशी से ‘हिन्दी भाषी वोट’ को मैनेज करने के लिए लाखों वसूल कर लिया है. ऐसी चर्चा हिन्दी भाषियों में अचानक जोरों पर है. इतना ही नहीं बल्कि एक राजनेता ने अनौपचारिक रूप से यह भी बताया चुनावी कवरेज के नाम हिन्दी भाषी पत्रकारों के नाम भी वसूली की गई।

ऐसे खुली पोल – एक प्रत्याशी की मैनेजमेंट टीम ने कुछ हिन्दी भाषी लोगों को चुनावी मिटिंग आयोजित करने के लिए बुलाया, तो पता चला उक्त मिटिंग का खर्च जिस हिन्दी भाषी नेता ने लिया है, उसने वहां पर दिया ही नहीं है. इससे प्रत्याशी ने स्वयं को ठगा सा महसूस किया और पार्टी के उच्च नेताओं को भी जानकारी दी. खैर..माजरा चाहे जो हो लेकिन चर्चा में गर्म यह विश्वासघाती मामला चुनावी वोटिंग व रिजल्ट के बाद और ज्यादा तुल पकड़ सकता है।

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