यूपी में भईआ रसूखदारी चटकी रहइअ चाहेअ बसी, जुगाड़-पानी त अपनऊ फिट्ट होइअ जा थ….कोरोना महामारी में सेनिटाइजरिंग क जरूरत रही त, अल्कोहल सेनिटाइजरिंग पर चिल्लहट काहे मची बा. ईहऊ गजब क समाजसेवा रहा यह कोरोना संकट में. ऐहमें बड़के व्यापारी से लईके जरूरतमंद पुलिस-दारोगा सहित नेता-परेता सबही तरी भ हयेंनि.
पाड़े कहेंनि जब ‘हमाम में सब नंघा हयेंनि’ त बोले का फायदा बा लेकिन ‘देशी नारंगी’ वाले त पकड़ाई गयेंनि, बेचारन ओन्हन चोरी-चुपके गरीबन क सेवा नाहीं कई पायेंनि. ई अंग्रेजी बोतल त बड़के-बड़के क दवाई रहा त, ऐहपे शिकंजा के कसइअ. ओईसे रईशों की महफिल अक्सर यही होता है, मस्ती में चलती है जिंदगी..पाप सिर्फ गरीबों की बस्ती में होता है. खैर..दरोगाबाबू त खुदीअई मस्त-मौला हयेंनि, कहेंनि लाॅकडाऊन में जब ऐतना कसरत होत रहा त, बिना टाॅनिक धीगरा लोगन क कइसे चलेअ. वइसे बड़कू परेताजी के कुनबा में टांग अड़ाई के फजीहत करइअ, ओहर एक्शन क मतलब हऊ नोकरी पर खतरा मंडराई जात, बिसरअ मति कि कजनी केतना जनेअ के साजिश रचिके परेताजी फंसाये हयेंनि. अंग्रेजी वाला बड़का-बड़हन ठीका-अड्डा कुलि ओन्हईअ के सोहदन क हऊ. अब अड्डा त बंद रहा अऊर मदमस्त तरी बहरे-बहरेअ ओनकरे घरे-दूआरे या होटल-ढाबा से चोरी-चुपके पार्सल बिकत रहा त हम का करीअ. गुरूजी फर्ज-ईमान क बात मति करअ, ई जिम्मेदारी त आबकारी विभाग के अधिकारिन क रहल कि लाॅकडाऊन में बोतल गिनिके अड्डा-गोदाम सील लगाये होतेनिं. अब चिल्लहट मचाये का फायदा…बंद रहल अंग्रेजी बोतल क दुकान, स्टाक हो गइल खाली.!!
(सामायिक व्यंग्य का आनंद लीजिये, ‘लाॅकडाऊन’ का पालन कीजिये..सोहदों से आग्रह हैं व्यंग्य में अपना कर्म-कुंडली ना झांकें.!!)

