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मौजूदा कानूनों की ‘भावना’ समझ, ‘योजना’ बनाते हैं ‘विधायकजी’, यही मुख्य है जिम्मेदारी…

एक विधायक (विधान सभा का सदस्य) बतौर जनता द्वारा उसके निर्वाचन क्षेत्र या चुनावी प्रभाग से चुना जाता है। विधान सभा क्षेत्र में एक प्रतिनिधि के रूप में विभिन्न जनहित योजनाओं को जमीनी हकीकत बनाना दायित्‍व है, जिसे बयां करके विधान सभा में संशोधन का पक्ष-विपक्ष रखना जिम्मेदारी है। यूं तो विधायक की विभिन्न भूमिका व जिम्मेदारी है लेकिन उसमें चार अलग-अलग भूमिकाओं को पूरा करने के लिए विधायक की विशेष आवश्यकता हो सकती है…

1 – विधायक की भूमिका में मौजूदा कानूनों की भावना को समझना, नए कानूनों की योजना बनाना और अध्ययन करना, चर्चा करना और फिर नए कानूनों को लागू करने का समर्थन या विरोध करना शामिल है।
2 – अपने या अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में, एक सदस्य घटक की ओर से आवाज उठा सकता है, दृष्टिकोण या अंतर का प्रतिनिधित्व कर सकता है और समस्या को हल करने में सहायता कर सकता है।
3 – एक विधायक एक निर्वाचित पार्टी का सदस्य भी होता है। इस समारोह में, वह सदन की योजना और ऑर्केस्ट्रेटिंग रणनीति में शामिल हो सकता है, उसके निर्णयों का समर्थन कर सकता है, और दिए गए विषय क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित कर सकता है।
4 – अपनी पार्टी के राजनीतिक भाग्य के आधार पर, विधायक कैबिनेट मंत्री या विपक्षी आलोचक के रूप में कार्य कर सकता है।

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