महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर निजी चैनलों पर पेश की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट्स से भाजपा उत्साह में है। यही कारण है कि चुनाव की घोषणा के साथ-साथ आचार संहिता लागू होने के बाद भी भाजपा-शिवसेना (जो कभी शिवसेना-भाजपा होती थी) युति की संहिता को लेकर संशय बरक़रार है।अखबारों और चैनलों पर ‘विश्वस्त’ सूत्रों से प्रसारित-प्रचारित खबरें कहती हैं कि दोनों पार्टियां लोकसभा की तरह बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हैं और दोनों 135- 135 सीटों पर लड़ेंगे व शेष 28 सीटें मित्र दलों के लिए छोड़ देंगे। इधर एक चैनल ने सर्वे में बताया कि यदि शिवसेना और भाजपा अलग-अलग चुनाव लड़तीं हैं तो इसमें भाजपा का बड़ा फायदा होगा और वह अपना पिछला प्रदर्शन सुधार कर 123 विधायकों से बढ़कर 144 अर्थात सीटें जीत सकती है और बिना मित्रदलों के अपनी सरकार बना सकती है। पता चला है कि भाजपा ने शिवसेना को केवल 120 सीटें ही देना चाहती है जिस पर शिवसेना तैयार नहीं है। इसलिए शिवसेना ने दो दिन के भीतर युति पर फैसला लेने के लिए भाजपा को अंतिमेत्थम् दिया है। भाजपा में मेगाभर्ती ने युति के समीकरण को और उलझा दिया है। भाजपा नए आये दिग्गजों को उनके ही क्षेत्र से लड़ाकर अपनी गिनती सुधारना चाहती है। इनमें कुछ सीटों पर शिवसेना पहले ही अपनी दावेदारी बनाये हुए है जिनमें नालासोपारा की सीट अहम है। मतलब साफ़ है सर्वे रिपोर्ट ने भाजपा को और ज्यादा निश्चिन्त कर दिया है।
युति की संहिता को लेकर संशय.!
