उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर कठोर कार्यवाही करने में शासनिक अधिकारी फेल होते नजर आ रहे हैं। बस्ती में ‘इज्जतघर’ यांनी शौचालय निर्माण करवाने में भ्रष्टाचार से अपना ‘मुंह काला’ करने वाले प्रधान और सेकेट्ररी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, जिसके बाद ग्रामीणों को आशा की किरण नजर आ रही है लेकिन यह सिर्फ बानगी है क्योंकि अधिकांश जिलों में यह कारनामा नासूर की तरह फैला है..✍️
गौरतलब है कि परशुरामपुर विकास क्षेत्र के वेदीपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान नसीबुन्निशा तथा सचिव दुर्गा प्रसाद पर शौचालय निर्माण की धनराशि में बंदरबांट कर लेने के आरोप में पुलिस ने सरकारी धन के दुरुपयोग का मुकदमा पंजीकृत किया है। मामला वर्ष 2019-20 का है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों ने डीएम आशुतोष निरंजन से शिकायत की थी कि गांव में शौचालय निर्माण के नाम पर ग्राम प्रधान तथा सचिव ने मिलकर लाखों का वारा न्यारा किया है। डीएम के आदेश पर परशुरामपुर के एडीओ पंचायत नंद कुमार ने दो जून को परशुरामपुर पुलिस को तहरीर देकर बताया कि ग्राम पंचायत में 274 शौचालय निर्माण के लिए धन दिए गए। निर्देशों व जांच के बाद 198 शौचालय बना दिए गए, लेकिन 14 का कार्य शुरू हुआ है। जबकि 62 शौचालय का पता नहीं है। शौचालय निर्माण के नाम पर सरकारी खाते से सत्र 2019-20 में ग्राम प्रधान नसीबुन्निशा तथा सचिव दुर्गा प्रसाद की मिलीभगत से 32.88 लाख रुपये आहरित किए गए। आरोप लगाया कि शौचालय निर्माण में लीपापोती कर सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया गया।
विवेचना जारी है…परशुरामपुर के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एडीओ पंचायत नंद कुमार की तहरीर पर ग्राम प्रधान नसीबुन्निशा व सचिव दुर्गा प्रसाद के विरुद्ध सरकारी धन का दुरुपयोग करने के मामले में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना की जा रही है।

