‘कलयुग’ में भले ही ‘समाज शास्त्र’ का ज्ञान, ‘अल्प विद्या भयंकरी’ की ‘भेंट’ चढ़ चुका हो लेकिन ‘इच्छाशक्ति’ से सामाजिक ‘परोपकार’ करने में ‘सशक्त परदेशी’ ही ‘नेतृत्वकार’ हैं। मुख्यतः इनके ‘अंतर्मन’ में ‘जाति-धर्म’ से परे ‘मानवता’ का वास होता है। ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक सामाजिक-धार्मिक कार्यों में प्रयासरत रहनें वाले ही ‘सशक्त परदेशी’ हैं, जिनकी संस्थागत टीम व उनके कार्यों को प्रोत्साहित करने हेतु ‘सशक्त परदेशी’ धारावाहिक शुभारंभित है..✍️
‘सशक्त परदेशी’ का अगला पड़ाव जाकर रुकता है मुंबई महानगर के भांडुप क्षेत्र में। जहां तुलशेत पाड़ा में जौनपुर का एक युवक मानव सेवा का एक “अनुपम” उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। अरे हां…’अनुपम’ उदाहरण से याद आया कि इस युवक का नाम ही अनुपम है। जी हां अनुपम दुबे। जो अपने दो भाइयों शिवम दुबे और शुभम दुबे के साथ-साथ अपनी धर्मपत्नी अधिवक्ता योगिता दुबे के सहयोग से रोज 200-250 असहाय, गरीब मजदूरों को भोजन पहुंचा रहे हैं, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र ही नहीं दूर-दराज के लोगों की जुबां पर भी है। जौनपुर सदर से 18 किमी दूर राजकीय हाईवे 32 पर गुलज़ार गंज बाज़ार के नजदीक सिऊरा ग्राम के निवासी दुबे अपना जीविकोपार्जन मुंबई में निजी कंपनी में कार्य करके करते हैं, उनकी धर्मपत्नी अधिवक्ता हैं। उत्तर भारतीय समाज में अग्रणी मंगला प्रसाद शुक्ला के दिशा निर्देशों पर लोगों को सहायता पहुंचाई जा रही है। भोजन के साथ-साथ 2500 मास्क भी बाटा गया है।
अनुपम दुबे के अनुसार यह सेवा कार्य किसी भी संस्था या राजनैतिक पार्टी के बिना सहयोग से चल रहा है। सेवा कार्य में व्यक्तिगत तौर पर अविनाश विश्वकर्मा, सोनू कश्यप, प्रदीप दुबे और पप्पू यादव शामिल हैं। यह भोजन वितरण ‘लॉकडॉउन’ जारी रहने तक चलता रहेगा।

