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सशक्त परदेशी (०४) – बिन ‘सभा’ गये..मानवता ‘पथिक’ जीत, ‘भदोहीवासी’ इन्हें ‘कहते’ हैं ‘सभाजीत’

कोरोना की महामारी में कल्याणकारी कार्य के नाम पर भले ही आप की नजरें संस्था व समाजसेवी तक सीमित रह जाय लेकिन सशक्त परदेशियों की भूमिका नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ‘सशक्त परदेशी’ धारावाहिक की इस कड़ी में पढ़िये सभाजीत मिश्रा के बारे में, जिन्होनें सैकड़ो चूल्हों में संजीवनी नहीं फूंका बल्कि अलख ज्योति…

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सशक्त परदेशी (03) – ‘जौनपुरिया’ युवा का ‘अनुपम’ प्रयास, यहां ‘बिखेर’ रहा ‘मानवता’ की छटा…

‘कलयुग’ में भले ही ‘समाज शास्त्र’ का ज्ञान, ‘अल्प विद्या भयंकरी’ की ‘भेंट’ चढ़ चुका हो लेकिन ‘इच्छाशक्ति’ से सामाजिक ‘परोपकार’ करने में ‘सशक्त परदेशी’ ही ‘नेतृत्वकार’ हैं। मुख्यतः इनके ‘अंतर्मन’ में ‘जाति-धर्म’ से परे ‘मानवता’ का वास होता है। ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक सामाजिक-धार्मिक कार्यों में प्रयासरत रहनें वाले ही ‘सशक्त परदेशी’ हैं, जिनकी…

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सशक्त परदेशी (02) – ‘भिवंडी’ से ‘लौट’ गये थे ‘जन्मभूमि’ भदोही, ‘प्रयागराज’ में अब ‘गूंथ’ रहे हैं ‘आटा’….

‘कलयुग’ में भले ही ‘समाज शास्त्र’ का ज्ञान, ‘अल्प विद्या भयंकरी’ की ‘भेंट’ चढ़ चुका हो लेकिन ‘इच्छाशक्ति’ से सामाजिक ‘परोपकार’ करने में ‘सशक्त परदेशी’ ही ‘नेतृत्वकार’ हैं। मुख्यतः इनके ‘अंतर्मन’ में ‘जाति-धर्म’ से परे ‘मानवता’ का वास होता है। ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक सामाजिक-धार्मिक कार्यों में प्रयासरत रहनें वाले ही ‘सशक्त परदेशी’ हैं, जिनकी…

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सशक्त परदेशी (01) – ‘भदोही’ के ‘गुलजारी’, यहां कर रहे हैं ‘मानवता’ गुलज़ार…

‘कलयुग’ में भले ही ‘समाज शास्त्र’ का ज्ञान, ‘अल्प विद्या भयंकरी’ की ‘भेंट’ चढ़ चुका है लेकिन ‘इच्छाशक्ति’ से सामाजिक ‘परोपकार’ करने में ‘सशक्त परदेशी’ ही ‘नेतृत्वकार’ हैं। मुख्यतः इनके ‘अंतर्मन’ में ‘जाति-धर्म’ से परे ‘मानवता’ का वास होता है। ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक सामाजिक-धार्मिक कार्यों में प्रयासरत रहनें वाले ही ‘सशक्त परदेशी’ हैं, जिनकी…

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