
कोई भी धार्मिक कार्य बिना पत्नी के पूर्ण नही होता है. यदि पत्नी है तो धार्मिक अनुष्ठान में उसे साथ जरूर रखना चाहिए. यदि धार्मिक आयोजन में सम्मिलित हो रहे हैं, तो अवश्य साथ में उपस्थिति दर्ज करवाएं. यदि दोनों उपस्थित हैं, तो डबल पुण्य लाभ मिलता है अन्यथा पति के पुण्य कार्यों में से पत्नी को आधा मिल जाता है लेकिन पत्नी के धार्मिक अनुष्ठान में से पति को पुण्य का हिस्सा प्राप्त नहीं होता. ऐसे कई बिंदुओं पर ‘ब्राह्मण समाज सांस्कृतिक संस्था’ द्वारा आयोजित श्रीराम कथा में कथावाचिका पंडिता अखिलेश्वरी देवी ने उद्गार व्यक्त किया।

गौरतलब है कि कल्याण-डोंबीवली क्षेत्र में दिसम्बर-जनवरी के दौरान जमकर धार्मिक कथा बरसती है. इसी क्रम में हजारों कथा रसिकों को ‘ब्राह्मण समाज सांस्कृतिक संस्था’ द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम का विशेष इंतजार रहता है. इसमें सर्वाधिक संख्या माताओं-बहनों (महिलाओं) की होती है. ‘ब्राह्मण समाज सांस्कृतिक संस्था’ के तत्वाधान में श्रीराम कथा आयोजन इस वर्ष भी डोंबिवली में जारी है, यहां इस वर्ष दिव्य कथावाचिका पंडिता अखिलेश्वरी देवी द्वारा मनभावन ‘श्रीराम कथा’ का वाचन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते है कि जब हम कथा सुनने जाते हैं, तो हमे नीद आती है।
ऐसे में “आप जरूर कथा में जायें, आप भले ही वहां पर सो जाएं चलेगा, पर जब कथा के बीच में आपकी आंखें खुलेगी, तो आप के कानों में भगवान की कथा के शब्द सुनाई पड़ेंगे.कथा ही वह मार्ग है, जो आपके अंदर एक अद्भुत ऊर्जा का संचार करता है.” यहां कथा में महिलाएं मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जोकि मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण कर रही हैं.

कथा आयोजन में जहां दूर-दराज से सैकड़ों सम्मानित महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति हो रही है, वहीं उनको आतिथ्य प्रेम देकर संस्था के दो दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी समर्पित भूमिका निभा रहें हैं. जगजाहिर है कि ‘ब्राह्मण समाज सांस्कृतिक संस्था’ एकमेंव ऐसी संस्था के रूप में चर्चित है, जिसमें कल्याण-डोंबिवली के श्रेष्ठ ब्राह्मणों के नेतृत्व में सर्व समाज के लोग उपस्थित रहकर धार्मिक-सांस्कृतिक पथ सेवारत रहते हैं।



