उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां बढ़ गई हैं. जहां इसको लेकर चुनाव आयोग भी तैयारियों में जुट गया है. जल्द ही जिला पंचायत चुनाव और ग्राम पंचायत चुनावों के लिए खर्च सीमा तय कर सकता है, जिससे लखपति ‘लखैरों’ पर शिकंजा कस उठेगा. जगजाहिर है कि लखपति ‘लखैरा’ नोट के दम में वोट बहोरकर पदासीन होते हैं और कुछ को छोड़कर बाकी ५ साल योजना कार्य धनराशि में लूट-खसोट करके मालामाल बनते हैं।
खबर के मुताबिक इसके अलावा इस बात की भी उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले समय में आरक्षण से संबंधित बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पिछले 25 साल से जो क्षेत्र आरक्षित हैं, वहां नियमों में बदलाव किया जा सकता है. खैर…खर्च सीमा को लेकर चुनाव आयोग 2015 की नियमावली का पालन कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ग्राम पंचायत चुनाव में उम्मीदवार 75 हजार से ज्यादा खर्च नहीं कर पाएंगे. वहीं, जिला पंचायत चुनाव में खर्च की सीमा 1 लाख 50 हजार होगी. इसके अलावा, जो व्यक्ति जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेगा, वह 4 लाख से अधिक खर्च नहीं कर पाएगा. खर्च पर निगरानी रखने के लिए जिलों में टीमें गठित की जाएंगी।




