उत्तर प्रदेश में बदमाशों के हौसले जितने बुलंद हैं, वह प्रदेश की गिरती कानून-व्यवस्था का साक्षात नमूना है। देर से ही सही पर पुलिस अब अपनी इज्जत बचाने के लिए बदमाशों का सफाया कर रही है लेकिन इसी बीच फर्जी एनकाउंटर को लेकर यूपी सरकार की जमकर छीछालेदर हो रही है।
गौरतलब है कि बदमाशों का सफाया होना भी चाहिए लेकिन जिस नाबालिग बदमाश को बाल सुधार गृह में भेजा जाना चाहिए, उन्हें भी बालिग बताकर पुलिस मार दे रही है। मुंबई से प्रकाशित एक दैनिक अखबार ने खबर प्रकाशित किया है कि हाल ही में दुर्दांत विकास दुबे गैंग के एक लड़के को पुलिस ने फरीदाबाद से पकड़ा और उसका एनकाउंटर कर दिया। पुलिस ने प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय नाम के इस लड़के की उम्र २० वर्ष बताई थी, जहां पअब उस लड़के की बहन हिमांशी ने उसके स्कूल की मार्कशीट दिखाई है, जिससे पता चलता है कि वह नाबालिग था। अब इस बात पर विवाद खड़ा हो गया है।
फरीदाबाद से लाते वक्त ९ जुलाई की सुबह प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय का एनकाउंटर किया गया था। पुलिस ने प्रेस नोट में प्रभात की उम्र २० साल बताई थी, जबकि मंगलवार को उसके परिवार ने दावा किया कि प्रभात की उम्र १७ साल थी। इसके समर्थन में उन्होंने उसकी १०वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड दिखाया। इसमें प्रभात की जन्मतिथि २७ मई २००४ लिखी है। हरियाणा और यूपी पुलिस की टीमों ने प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय को ७ जुलाई की रात फरीदाबाद में पकड़ा था। दावा किया गया था कि प्रभात और अन्य के साथ विकास दुबे भी था, जो कुछ समय पहले भाग निकला था। फरीदाबाद की अदालत से ८ जुलाई को उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया।

