उत्तर प्रदेश के पुर्वांचल में भदोही जनपद सदैव सुर्खियों का केंद्र रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखनें हेतु यहां विभिन्न थानों के ‘प्रभारी’ समयानुसार बदलते रहे हैं। एक बार फिर से पुराने अनुभवी प्रभारियों को फील्ड पर लाने तैयारी को लेकर आंतरिक खबरें मिल रही हैं।
गौरतलब है कि भदोही जनपद के विभिन्न पुलिस थानों में तैनात रहे पूर्व अनुभवी थाना प्रभारियों में से कुछ जहां गैर जनपद तबादला हो चुके हैं, वहीं कुछ की छोटे-मोटे मामलों में ही थाने से बैरक वापसी हुई थी। पूर्व एसपी रहे आईपीएस राजेश एस व सचीन्द्र पटेल के कार्यकाल में किसी छोटे मामले में भी बवाल मंडराते ही तेज-तर्रार थाना प्रभारी को या तो लाईन हाजिर, या फिर चंद महीनों में ही कार्यवाही रिकार्ड ‘रिपोर्ट कार्ड’ खंगालकर तबादला कर दिया जाता था। सचीन्द्र पटेल के कार्यकाल में मुख्य फोकस पशु तस्करी व मादक पदार्थों पर रहा था, जिस पर कार्यवाही करते हुये सुनील वर्मा, सुनील दत्त दूबे व विजय प्रताप सिंह जैसे थाना प्रभारी सुर्खियों में थे, वहीं राजेश एस के कार्यकाल में अपराधिक मामलों के खुलासे-पर्दाफाश व गिरफ्तारी का दौर था। कुछ थाना प्रभारी अन्य थानों में जोरदार प्रतिसाद देनें के बाद हाइवे थानों तक पहुंचे थे लेकिन बैटिंग शुरू करते, उससे पहले ही विभिन्न कारणों से पवेलियन बुला लिया गया। उपरोक्त दोनों भदोही एसपी के कार्यकाल में एक समानता यह थी कि राजनैतिक दबाव में किसी पर जघन्य धाराओं में मामले दर्ज करने की हिम्मत थाना प्रभारियों में नहीं थी। कमोबेश आम जनता पीड़ित होकर एसपी दरबार पहुंचती थी तो, सफेदपोशों पर त्वरित आपराधिक मामला लिखकर कार्यवाही तेज कर दी जाती थी।

फिलहाल वर्तमान भदोही एसपी रामबदन सिंह के कार्यकाल में शालिनता व मानवता का दौर रहा है, जिसके कारण उनके विशिष्ट अनुभव से कोरोना संकट में भी पुलिसकर्मियों की सेवाभामी भूमिका चुस्त-दुरुस्त है। कई हाइटेक मामले दर्ज करके उसे न्यायालय तक खुलासे के साथ पहुंचाने में कामयाबी भी मिली है लेकिन कई थाना प्रभारियों की सक्रियता जहां राजनैतिक दबाव में पशु तस्करी व मादक पदार्थों की तस्करी सहित छोटे-मोटे मामलों में भी संदिग्ध हो चली है, वहीं पिछले कुछ वर्षों के रूटीन कार्यवाही के रिकार्ड में भी पिछड़े हैं। विगत् महीनों से तब्लीगी जमात के संरक्षकों को क्लीन चिट मिलना, सफाईकर्मियों के साथ मारपीट करने वाले भाजपाई बुचड़खाना संचालक पर शिकंजा न कसना, रामपुर घाट पर व्यवस्था दुरुस्ती मामला, लहूलुहान होने वालों पर एससीएसटी लगना, पीड़ित लहूलुहान परिवार पर भी मुकदमा करना जैसे कई छोटे-छोटे मामलों में भी थाना प्रभारी की कोताही से मामला एसपी आफिस पहुंचना काफी चर्चा में रहा है। पिछले दिनों में भदोही जनपद में छिपे हिस्ट्रीशीटरों को अन्य जिले की क्राइम ब्रांच व एसआईटी द्वारा भी डाईरेक्ट गिरफ्त में लेकर जाने से बेखबर थाना प्रभारियों को लेकर विभिन्न तरह की क्षेत्रीय चर्चायें जारी हैं।
लौटेगें ‘अनुभवी’ थाना प्रभारी – कोरोना संकट में जनसेवा में व्यस्तता के कारण जहां थाना प्रभारियों के आंतरिक तबादले रूके हैं, वहीं विभिन्न मामलों में विवादित हो चले कुछ थाना प्रभारियों के रूटीन कार्यवाही पर उच्च अधिकारियों की विशेष नजर है। एक उच्च पुलिस अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में ‘सशक्त समाज न्यूज’ को बताया कि सुनीलनामीं थाना प्रभारी गैर जनपद तबादले के बाद डियुुटी में हैं लेकििन जल्द ही विभिन्न थाना प्रभारियों के थाने बदलने के साथ, कुछ बैरक बैठे पुराने अनुभवी थानेदारों को फील्ड पर तैनात करने की पहल चल रही है। इसके बाद पुनः एक बार क्षेत्रीय नेटवर्क के सहारे रूटीन कार्यवाही तेज होने के साथ पुराने मामलों की निष्पक्ष विवेचना की मुहिम तेज होगी।

http://www.sashaktsamaajnews.com/2020/05/25/issues-on-migrate-labour/
