भदोही जनपद में अस्पताल के मांग हेतु अलख तो जग उठी है लेकिन ‘बिन सुविधा’ सिसकियां भरते दर्जनों सरकारी स्वास्थ्य केंद्र खुद ही अपना दर्द बयां कर रहे हैं। ऐसे में ११ सालों से निर्माणाधीन ‘भ्रष्टाचार के कोढ़’ से ‘ग्रस्त’ खंडहर ‘१०० शैय्या’ संयुक्त चिकित्सालय को ‘हैंडओवर’ लेकर संबंधित जिला शासनिक-प्रशासनिक अधिकारी उलझनें के बजाय चौकन्ने हैं।
गौरतलब कोरोना वायरस के संक्रमण काल में बेदम स्वास्थ्य सुविधाएं मुश्किलें बढ़ाती नजर आ रही हैं। सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी झलक रही है। संभावित 20 लाख की आबादी वाले जिले में समस्याएं जटिल हैं। फिर भी शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से बेहतर कार्यशैली समक्ष है। फिलहाल मामला सुर्खियों में आने के बाद ४ वेंटिलेटर मिलने की वाहवाही तो खूब लूटी गई। फिर भी ‘रेफर सिस्टम’ की गाथा खुलेआमं, दो दर्जन से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ‘बिन सुविधा’ की गवाही दे रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 26 साल पूर्व वाराणसी से कटकर भदोही जिले का सृजन हुआ। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी के लिए करोड़ों-अरबों की परियोजनाएं स्वीकृत हुई, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं हो सकी। दो जिला चिकित्सालय, पांच सीएचसी और 16 पीएचसी बने, हालांकि वेंटिलेटर की सुविधा भी किल्लत में रही। आलम यह है कि ज्ञानपुर जिला चिकित्सालय में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की मशीनें विशेषज्ञ की कमी से दो साल से बंद है। जबकि सुरियावां सीएचसी में एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला अस्पताल, एमबीएस, सीएचसी डीघ, तीन निजी अस्पताल और कार्पेट एक्सपो मार्ट में कुल 500 से अधिक आइसोलेशन वार्ड बना दिए गये हैं। फिलहाल गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर सहित विभिन्न संसाधनों के साथ कितने अनुभवी डाक्टर यहां उपलब्ध रहेगें, यह तो रियल्टी चेक से ही पता चलेगा क्योंकि अभी भी ‘रेफर प्रक्रिया’ दमदार भूमिका में है।
‘रेफरमौत’ का ‘जिम्मेदार’ कौन...भदोही वासियों में इन दिनों सर्वाधिक चर्चा ‘रेफरमौत’ को लेकर चल रही है। वर्षों से क्रिटिकल केस जिला अस्पताल सहित २ दर्जन सरकारी स्वास्थ्य केेंद्र होने के बाद भदोही जनपद नहीं संभाल पाता है, जिसके कारण सोनभद्र-वाराणसी रेफर के दौरान रास्ते में कई मरीज दम तोड़ देते हैं। इस ‘रेफरमौत’ के लिए अस्पतालों में मशीनरी-संसाधन, दवाइयों की कमी, अनुभवी डाक्टरों कीी कमी या कई गांव में लाखों से बनकर बंद पड़े स्वास्थ्य केन्द्र जिम्मेंदार हैं या फिर सत्ता-शासन के साथ जनप्रतिनिधियों सहित हमारी और आपकी मौन उदासीनता…यह तो आत्ममंथन का विषय है। फिर भी ‘भ्रष्टाचार’ के ‘कोढ़’ से ‘ग्रस्त’ ११ वर्षों से खंडहर निर्माणाधीन ‘१०० शैय्या संयुक्त चिकित्सालय’ को हैंडओवर लेने के लिए जिलाधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है क्योंकि करोड़ों भ्रष्टाचार से लथपथ फाईल एसआईटी की जांच में है। ११ वर्षों में अस्पताल सुसज्जित नहीं कर पाने वाले ठेकेदारों पर शिकंजा कस रहा है, उन्हें भी ‘रेेफरमौत’ का कुछ लोग जिम्मेदार मानते हैं। इसका तर्क यह है कि यदि समय पर अस्पताल बनकर मिल जाता तो शायद आज आधुनिक मशीनरी व डाक्टरों से लैश होकर शुरू हो गया होता, तो शायद कुछ जाने ‘रेफरमौत’ से बच जाती।

http://www.sashaktsamaajnews.com/2020/05/26/bhadohi-health-corruption/


