भारत में जनसंख्या नियन्त्रण कानून बने या न बने लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक ऐसा संकेत दिया है। सच में यह तैयारी जनसंख्या विस्फोट की संभावित समस्या को कम करने में काफी कारगर साबित होगी। इस नीति को लागू हो जाने के डर से मनमानी बच्चा पैदा करने वालो की हवा निकल गई है। सरकार का यह फैसला यदि सच में लागू हो जायेगा तो सच इसका असर और फायदा काफी दिखेगा। सरकार को चाहिए कि तीसरे बच्चे को कोई भी सरकारी योजना का लाभ किसी भी कीमत पर न मिले जिससे मनमानी बच्चा पैदा करने वालो को सीख मिले। अभी तो यह चर्चा है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है। सरकारी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। सरकारी योजनाओं का लाभ देने में उन्हीं दम्पति को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके दो या उससे कम बच्चे होंगे। ये संकेत प्रदेश सरकार की तैयार हो रही प्रस्तावित जनसंख्या नीति से मिले हैं। पंचायत चुनाव में लागू हो सकती है नई जनसंख्या नीति। प्रस्तावित जनसंख्या नीति को सरकारी नौकरियों से भी जोड़ने पर विचार चल रहा है। यह नीति भर्ती से लेकर प्रोन्नति के मामलों मे भी लागू रहेगी। इस साल होने वाले पंचायत और उसके बाद स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ही नई जनसंख्या नीति बन जाने की संभावना है। नीति को सबसे पहले पंचायत चुनावों में लागू किया जा सकता है। साल 2025 तक 2.1 सकल प्रजनन दर लक्ष्य
सरकार ने साल 2025 तक सकल प्रजनन दर 2.1 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभी तक शहरी आबादी में तो सकल प्रजनन दर 2.1 है। यह शहरी लोगों की खुद की जागरूकता के कारण दर बनी है। लेकिन ग्रामीण आबादी में यही दर 3 तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सरकार का फोकस ग्रामीण आबादी पर ज्यादा रहेगा। एक जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में प्रदेश की जनसंख्या 22 करोड़ से अधिक है। प्रदेश की आबादी हर 10 साल में 20 फीसदी बढ़ रही है। हालांकि इस फैसले से कुछ लोगो को अपनी राजनीति चमकाने का मिलेगा लेकिन जनसंख्या नीति लोगो के लिए कारगर साबित होगी। जिस तरह का फैसला उत्तर प्रदेश सरकार लेने जा रही है उसी तरह की नीति पूरे देश में बन जाये तो भारत की बढती हुई बेतहाशा जनसंख्या वृद्धि पर रोक लग जायेगी। तथा इसके साथ साथ बेरोजगारी, गरीबी, बीमारी, अशिक्षा, भूखमरी समेत कई समस्याएं स्वतः कम होने लगेगी। यदि सरकार जनसंख्या नीति लागू नही करती और यूं ही छोड देती है तो अभी तो एक दशक में 20% की वृद्धि दर्ज हो रही है। और आगे के दशक में और बढ सकती है। इस नीति को लेकर सरकार को किसी भी तरह का कोई समझौता किये बिना लागू करना ही जरूरी है। जिस दिन से यह नीति लागू हो जायेगी उसी दिन से अच्छे दिन की शुरूआत हो जायेगी। कुछ सरकारों द्वारा नसबंदी को प्रोत्साहित किया गया लेकिन वह प्रजनन दर को कम करने में ज्यादा प्रभावी नही हुआ। यदि वही अनिवार्य कर दिया गया होता तो बेशक अच्छे परिणाम मिलते। लेकिन योगी सरकार जब प्रजनन को सरकारी योजनाओं व लाभ से जोड देने का विचार कर रही है तो लोग इससे बचने के लिए दो बच्चों से ज्यादा बच्चा पैदा करने से गुरेज करेंगे। लेकिन कुछ लोग सरकार के लाभ को तिलांजलि देकर अपने रूढीवादी विचारधारा को भी मजबूती प्रदान करने के लिए चीन की जनसंख्या से दो दो हाथ करने को भी तैयार है। हालांकि सरकार की यह नीति लागू होगी तो सच में एक बहुत ऐतिहासिक फैसला होगा। इसीलिए सरकार जनसंख्या नीति को लागू करके देश के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाकर एक मिशाल पेश करना चाहिए। और इस नीति का आम आदमी और सभी राजनीतिक दलों को भी समर्थन करना चाहिए क्योकि देश व प्रदेशों की बढती हुई जनसंख्या ही विभिन्न समस्याओं का प्रमुख कारण के रूप में दिख रही है। जिसमें सभी का समर्थन और सहयोग जरूरी है। इस नीति को लागू कराने और पालन कराने में सभी राजनीतिक दल एकमत होकर सरकार के इस पहल का समर्थन करके देश को जनसंख्या के विस्फोट के कुचक्र से बाहर निकालने में सहयोगी साबित हो।
