नव वर्ष का प्रारंभ शतभिषा नक्षत्र में हो रहा है, जोकि पंचक संज्ञक नक्षत्र कहा जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी यदि नवग्रहों के आधार पर देखा जाए तो राहु ग्रह माना जाता है। वर्षारंभ की कुंडली में राहु ग्रह राज्यभाव में बैठने के प्रभाव के कारण भारत देश रहस्यमय दार्शनिक और वैज्ञानिक जैसे विचारों से संपन्न होकर के उच्च स्थान एवं आचरण प्राप्त करेगा। यदि लग्न के आधार पर वर्षारंभ का विश्लेषण कर रहे हैं तो मध्य रात्रि में कन्या लग्न बन रहा है। कन्या लग्न के आधार पर नवग्रहों की स्थिति निम्न प्रकार से है…पराक्रमेश एवं अष्टमेश मंगल स्वगृही होकर के पराक्रम भाव में बैठा है तथा सुख भाव में सुखेश एवं सप्तमेश बृहस्पति स्वग्रही होकर शनि, बुध ,केतु , सूर्य पंचग्रही योग बना रहे, पंचम भाव पर भाग्येश शुक्र, छठे भाव पर लाभेश चंद्र,हतथा राज्य भाव पर उच्च राशि का राहु बैठा हुआ है। वर्षारंभ में इस प्रकार के ग्रहों के प्रभाव के कारण भारत देश की आंतरिक-राजनीतिक पार्टियां असंतोष और अशांति पैदा करेंगे क्योंकि 3 दिसंबर 2020 तक राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा होगी। वर्षारंभ की कुंडली में राहु एवं मंगल की खडाष्टक योग के कारण शत्रु वर्गों के द्वारा उत्पात कर अशांति पैदा करने का पूर्ण प्रयास करेंगे और मित्र देश भी युद्ध का प्रयास करेंगे। राज्य स्थान पर बहस पति अपने मूलत्रिकोण पर सूर्य पुत्र शनि केतु के साथ में बैठा है। अतः केंद्र सरकार को कांटो की राह पर चलना और उस पर सोने के बराबर होगा, 2020 में भयंकर उतार-चढ़ाव भी रहेगा सरकार दो या तीन कड़े निर्णय लेगी, जिसके कारण विरोधी दलों को काफी परेशानी संभव है। भारत विश्व में महत्वपूर्ण शक्ति प्राप्त करेगा शुक्र पंचम भाव में मित्र शनि की राशि स्थित होने के से भारत को मित्र दोषों से भरपूर सहयोग होगा और व्यवसाय भी मजबूत होगा।
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