बाढ़ ले डूबी मुख्यमंत्री का महाजनादेश.!

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच अभी तक भाजपा-शिवसेना युति के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। खबर है कि युति के रणनीतिकार वंचित बहुजन आघाड़ी के कांग्रेस-राकांपा गठबंधन में शामिल होने न होने के की राह देख रहे हैं। हालांकि अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके वबआ के अगुआ प्रकाश आम्बेडकर अब भी यूपीए नेताओं के संपर्क में हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि वबआ अकेले दम पर चुनाव लडती है तो इससे भाजपा का फायदा होगा और इसलिए भाजपा अपनी ओर से सीटों के बंटवारे को लेकर बहुत ज्यादा उत्साह में नहीं है। 17वीं लोकसभा चुनाव परिणामों के आधार पर भाजपा का मानना है कि सरकार युति की ही बनेगी। लेकिन एक बात को लेकर भाजपा में भ्रम की स्थिति है कि लोकसभा चुनावों में बढ़त सिर्फ भाजपा के कारण थी या युति के कारण। इसके अलावा पेंच बंटवारे में सीटों की संख्या को लेकर भी है। खासकर तब जब भाजपा के मौजूदा विधायकों की संख्या शिवसेना के विधायकों की संख्या से लगभग दो गुनी (180 प्रतिशत) हो। वैसे भी पिछले कुछ समय से शिवसेना ने गाहे-बगाहे मुख्यमंत्री पद पर भी अपना दावा तेज किया है जिसका भाजपा ने हमेशा पलट जवाब दिया है कि मुख्यमंत्री तो भाजपा का ही होगा। खबर यह भी है कि यदि किन्हीं कारणोंवश भाजपा शिवसेना अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे तो जहाँ-जहाँ भाजपा कमजोर है वहां दूसरे दलों के बड़े नेता भाजपा में शामिल कर चुनाव लड़ा जाये। वैसे यह भी उल्लेखनीय है कि शिवसेना, भाजपा और राकांपा चुनावी यात्राओं का आयोजन भी कर चुके हैं यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री की महाजनादेश यात्रा को बाढ़ ले डूबी।

(स्तंभकार विभिन्न सुप्रसिद्ध दैनिक अखबारों के संपादक रह चुके हैं…)

Leave a Reply

Discover more from सशक्त समाज न्यूज़

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading