‘योगीजी’ पूछिये..कहां है नाबालिक बेटी.
राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ भले ही सुशासन की बात करते हैं लेकिन पुलिस प्रशासन में बैठे अधिकांश वहीं अधिकारी हैं, जो सिर्फ पिछली सरकार की तरह कागजी कार्यवाही से ही भाजपा सरकार को भी गौरवान्वित करना चाहते हैं लेकिन जमीनी हकीकत उन्नाव हो या सोनभद्र शायद ही छिपी हो। एक ऐसी ही घटना फतेहपुर जनपद की है, जहां अब मुख्यमंत्री कार्यालय भी जनसुनवाई की आख्या में झूठे आश्वासन की रिपोर्ट भेजी जाती है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद अंतर्गत कल्याणपुर थाना में १८ जनवरी २०१८ को एक पीड़ित परिवार ने मामला दर्ज कराया, जिसमें बताया कि १५ वर्षीय बेटी अपेक्षा (रूपांतरित नाम) विगत ५ जनवरी २०१८ से लापता अथवा अपहृत है। पुलिस ने भी मामला तो दर्ज किया लेकिन इस मामले में थानेदार बदलते रहें और आश्वासन की शिवाय कुछ नहीं मिला। पीड़ित परिवार के मुताबिक नाबालिक बेटी की तलाश हेतु पुलिस ने कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की है। विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवम् प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय सहित डीएम-एसपी को खत भेजा गया लेकिन फतेहपुर जनपद पुलिस के पास आख्या-व्याख्या के नाम पर सिर्फ आश्वासन प्रतिक्रिया के कुछ नहीं है। यह अक्सर होता रहा है कि पुलिस सिर्फ एफआईआर दर्ज करके अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेती है। सवाल उठना लाजिमी है कि डेढ़ सालों में सिर्फ आश्वासन आख्या देते पुलिस अधिकारी क्या उनकी स्वयं की बेटी होती तो भी इसी तरह कार्य करते या पीड़ित परिवार का पीड़ात्मक दर्द उनकी समझ से परे है।
राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ बेटियों के हित की रक्षा के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं लेकिन अपहरण या गुमशुदगी के मामलों में हाईटेक यूपी पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है। उपरोक्त मामले में पीड़ित परिवार को आस है कि शायद राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ फतेहपुर पुलिस से डेढ़ से लापता नाबालिक बेटी कहां हैं पूछ लें तो शायद कोई सकारात्मक जानकारी मिल जाय।
कलमकार – सुनील तिवारी
