हनुमानजी महराज के दरबार में आशीष बटोरने की लालसा से डेरा जमाने वाले पंडित, पंडा अथवा भक्तों को शायद ही पता होगा कि उक्त दरबार से मिलता क्या-क्या है। विभिन्न शास्त्रार्थ तथ्यों से जगजाहिर है…परंपरागत रूप से हनुमानजी महराज को बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं बल्कि संकटक में हनुमानजी का ही स्मरण किया जाता है और शायद इसीलिए वह संकटमोचन कहलाते हैं। संकटमोचन बतौर गौरवान्वित हनुमानजी महराज अपने दरबारी भक्तों को संकट से उबारने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। वैसे पौराणिक-शास्त्रार्थ तथ्यों में पूर्वजों का भी दिव्य दर्शन है।
- शिवातार हनुमानजी रूद्रावतार भी.!

हनुमान को शिवावतार अथवा रुद्रावतार भी माना जाता है। रुद्र आँधी-तूफान के अधिष्ठाता देवता भी हैं और देवराज इंद्र के साथी भी। विष्णु पुराण के अनुसार रुद्रों का उद्भव ब्रह्माजी की भृकुटी से हुआ था। हनुमानजी वायुदेव अथवा मारुति नामक रुद्र के पुत्र थे।
