लोकसभा चुनाव में वोटिंग से पहले कुछ ऐसा हुआ कि चर्चा क्षेत्र में अधिकांश लोगों की जुबां पर पहुंच चुकी है. एक गांव के ‘प्रधान पुत्र’, तो दूसरे गांव के ‘प्रधान पति’ को ‘गद्दारों की लिस्ट’ में समाविष्ट किया गया था. नेताओं ने इन दोनों गांव के नुमाइंदों को एक होटल में बुलाकर, इनकी जमकर परेड भी ली है।
गौरतलब है कि चुनावी दौर में दो नांव की सवारी करके कई गांव के स्वयं घोषित युवा नेता क्षेत्र में भौकाल टाईट करते देखे जा सकते हैं. ज्ञानपुर विधान सभा क्षेत्र के अधिकांश गांव में ऐसे भौकाली मिल जाएगें, जो जिधर मलाई, उधर ठूमका लगाने से बाज नहीं आते. फिलहाल अब राजनीति में ऐसे गांवछाप भौकालबाजों पर विधायक, ब्लाक प्रमुख व पार्टी के जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने नजर गड़ाना शुरू कर दिया है. राजनीतिक सुत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी नेतागिरी चमकाने में जुटे दो गांव के तथाकथित नुमाइंदों को करारा झटका लगा है. जहां एक गांव के ‘प्रधान पुत्र’ व दूसरे गांव के ‘प्रधान पति’ का पुराना रिकार्ड चेक करके उन्हें नेताओं ने ‘गद्दार लिस्ट’ में शामिल कर लिया. क्षेत्रीय चर्चा मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव में भी इन दोनों ने भाजपा के साथ विश्वासघात किया था. वोट का ठेकेदार बनकर घूमने वाले इसी ‘प्रधान पुत्र’ व दूसरे ‘प्रधान पति’ के गांव से सपा व अन्य से भाजपा को काफी कम वोट मिले थे. उक्त डेटा खंगालते हुए लोकसभा चुनाव में वोटिंग के पहले ही इनकी परेड एक होटल में बुलाकर ली गई. आश्वासन देकर आए हैं कि इस लोकसभा चुनाव में गद्दारी नहीं करेगें और विपक्ष से काफी ज्यादा वोट भाजपा को दिलवाएगें।
खैर..विधायक व ब्लाक प्रमुख के इर्द-गिर्द भटकनें वाले इस ‘प्रधान पुत्र’ व ‘प्रधान पति’ के गांव में भाजपा बूरी तरह क्यों पिछड़ जाती है.? यह नेताओं में चर्चा का विषय बनना भी लाजमी था. अब भले जन्नत में मन्नत हुआ हो लेकिन ४ जून को पता चल जाएगा कि उपरोक्त भौकाली ‘प्रधान पुत्र’ व ‘प्रधान पति’ के गांव से कितने वोट भाजपा की झोली में गए है. यदि यहा फिर से भाजपा पिछड़ती है, तो इन्हें साथ लेकर घूमने वाले विधायक-ब्लाक प्रमुख व नेताओं को आत्ममंथन करने की जरूरत पड़ जाएगी।
कहीं प्रधान के देवर, कहीं पति, तो कहीं बेटे की हूँकूमत, दरबारी बने सेकेट्ररी.!!



