भदोही में इन दिनों जहां लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी माहौल गर्म है, वहीं (डीघ ब्लाक प्रमुख) मनीष मिश्रा को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. कुछ दिनों से उनके अधिकांश समर्थक यह कहते घूम रहे थे कि जेल से आ रहें हैं (डीघ ब्लाक प्रमुख) मनीष मिश्रा...कुछ फूलों की माला लेकर पहुंचने की अपनी तैयारी का बखान बताते फिर रहे थे, तो कुछ दावा कर रहे थे कि गाड़ियों के काफिले की तैयारी हो चुकी है. फिलहाल इस मामले में आए अचानक मोड़ ने फिर से 'कहीं खुशी, कहीं गम' का पारा चढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि मनीष मिश्रा के उपर कई मुकदमें दर्ज हैं, जिसमें से अधिकांश में उन्हें जमानत मिल चुकी है. ताजा माजरा यह है कि वाराणसी की दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने के मामले में हाईकोर्ट ने पिछले दिनों जमानत स्वीकार किया था, जिसके बाद से समर्थकों ने आगमन की तैयारियां तेज कर दी थी. हालांकि कुछ राजनीतिक विरोधियों में इसे लेकर गम का माहौल था, उन्होंने कानूनी दाव-पेंच खंगलवानें के साथ दुष्कर्म पीड़िता को भी संपर्क करना शुरू कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समय मनीष मिश्रा बरेली जेल में बंद हैं. उपरोक्त मामले में बीते दिनों हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी. इसे लेकर पीड़िता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
कहीं खुशी, कहीं गम - मनीष मिश्रा के समर्थकों को जहां यह खबर मायूसी में डाल सकती है, वहीं राजनीतिक विरोधियों के गढ़ में खुशी का माहौल है. रविवार की रात से मनीष मिश्रा के समर्थकों को विरोधी खेमें वाले चिढ़ाते हुए...कहते घूम रहें हैं कि 'कईसन भैआ, ई नवा खेल होई ग..।