
मैहर धाम में ‘एसडीएम’ की कुर्सी पर बैठे सुरेश जादव पर ‘मैया के मोहन’ यांनी एमपी के मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षक जरूरी है. मुख्यतः ऐसी आवाज दूर-दराज से मैया की भक्ति करने पहूंचे भक्तगणों के साथ भाजपा नेता व सनातनी संगठन उठा रहे हैं. मुख्यतः इसका कारण है कि एसडीएम की करतूतों से मध्य प्रदेश में स्थापित ‘सनातनी’ सरकार की छवि को ठेस लगा है।

गौरतलब है कि मैया की भक्ति में भावविभोर होकर अब जहां हजारों-लाखों भक्तगण मैहर धाम पहूंचने लगे हैं, वहीं शासनिक अधिकारी उन्हें ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बरोबर भी व्यवस्था मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं. यदि यकीन ना हो, तो खंडहर हुए शासनिक ‘यात्री निवास नं. -1’ व ‘यात्री निवास नंबर – 3’ की व्यवस्था देखा जा सकता है. इतना ही नहीं बल्कि ‘यात्री निवास नं. – 2’ भले ही सुचारू रूप से संचालित है लेकिन एसी बंद, पहली मंजिला के बाथरूम का पानी नीचे के रूम में टपकना, बिस्तर की कमी इत्यादि की व्यवस्था पर ‘थर्ड पार्टी’ जांच जरूर करवा लेना चाहिए. खैर..छोड़िए शासनिक ‘यात्री निवास’ की चर्चा क्योंकि अब तो भक्ति पर ही पहरा लगाने वाले एसडीएम साहब मैहर धाम में कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे हैं. जी हां..मुख्यमंत्रीजी, यही कड़वा सच प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ लिखा जा रहा है. एसडीएम सुरेश जादव ने कुछ ऐसा ही अक्षम्य कृत्य-कारनामा करके, उसे मुख्यमंत्री का आदेश बताकर..बवंडर सरकार पर थोप दिया, तब सैकड़ों मैया भक्तगण यह देखकर ‘सनातनी सरकार’ को कोषने लगे. हालांकि पत्रकारों ने जब सरकारी दस्तावेज खंगालकर ‘सनातनी सरकार’ की व्यवस्था को देखा, तो भौचक्के रह गए…क्योंकि मुख्यमंत्रीजी आपके आदेश व सरकार की व्यवस्था में कहीं ऐसा नजर नहीं आया कि मैया के धाम में भजन-कीर्तन का स्लो साऊंड भी दिन-शाम में रोक दिया जाय…मैया भक्तगणों के साथ दूर-दराज क्षेत्र के भाजपा नेता व सनातनी संगठनों के पदाधिकारी बतौर आयोजक यह आज तक नहीं समझ पा रहे हैं कि एसडीएम ने ऐसा कृत्य करके सरकार पर क्यों थोपा.? वर्षों से ‘मैहर धाम यात्रा’ लेकर पहूंचने वाले हनुमान दूतों व मैया सपूतों से ‘दुर्व्यवहार’ क्यों.? ‘मैहर धाम यात्रा’ आयोजन में एसडीएम द्वारा ‘स्लो साऊंड की नियमावली’ बताने के बजाय अनुमति नहीं देना और फिर आयोजन स्थल पर पहूंचकर स्लो साऊंड भी शाम ८ बजे बंद करवाने के लिए धौंस दिखाना कहां तक उचित है.? ऐसे एसडीएम के मार्फत हुए सभी व्यवस्था कार्यों पर जांच बैठाकर, सनातनी संगठनों व भाजपा नेताओं द्वारा इन्हें धार्मिकता का पाठ पढ़ाने की मांग की जा रही है।





