बिना टेंडर के ग्राम निधि से धन निकालने की होगी जांच.!!
नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद नवनिर्वाचित प्रधान और सेक्रेटरियों द्वारा बिना टेंडर प्रकाशन कराए ही मनमाने तरीके से ग्राम निधि खातों से रुपए निकालकर खर्च किए जाने की शिकायत बढ़ती जा रही है, जिसे लेकर पंचायत राज के उच्च अधिकारियों तक शिकायतें पहुंच रही हैं. इन शिकायती पत्र में आरोप है कि गांवों में हैंडपंप रिबोर, वाटर सप्लाई, कीटनाशक घोल के छिड़काव, कोविड गाइड लाइन के प्रचार-प्रसार, सीमेंटेड बेंच और सोलर लाइट के नाम पर रुपये निकाले गए, जोकि कई ग्राम प्रधान व सेकेट्ररी मिलकर मनमाने तरीके से खर्च कर रहे हैं।
वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर जैसे यूपी के अधिकांश जिलों में यह खेल चल ही रहा था कि अचानक मऊ जिले में पोल खुल गई. पंचायती राज निदेशालय की गाइड लाइन के अनुसार गांव में विकास कार्य टेंडर प्रकाशन के बाद ही कराए जाने चाहिए लेकिन इस नियम की उपेक्षा कर प्रधानों और सचिवों ने मनमाने तरीके से ग्राम निधि खाते से रुपए निकाले।इस मामले में सवाल उठने पर सितंबर महीने में टेंडर प्रकाशन की प्रक्रिया अपनाई गई. बिना टेंडर प्रकाशन के गांवों में कराए गए विकास कार्यों को लेकर जांच समितियों का गठन किया गया। जांच अधिकारियों ने गांवो में जाकर स्थलीय जांच की. जांच के दौरान जांच अधिकारियों ने पाया कि गांव में अधिकांश कार्य कराए गए हैं लेकिन जो विकास कार्य कराए गए हैं वे टेंडर प्रकाशन से पूर्व ही कराए गए हैं, जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।
मऊ मामले की बात करें तो जनपद के 671 ग्राम पंचायतों में से लगभग 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में टेंडर प्रकाशन से पूर्व धन निकाले जाने की शिकायतें आईं थीं। ऐसे ही एक मामले में बड़राव ब्लाक में तैनात एक सेक्रेटरी को बर्खास्त तक किया जा चुका है। इस को प्रकरण को 11 अक्टूबर को विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति के समक्ष भी उठाया गया था। सूत्रों के अनुसार इस पर विचार के उपरांत समिति के सभापति देवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से प्रकरण की जांच एसआईटी से कराने के निर्देश दिये गये। अब जब इस प्रकरण की जांच एसआईटी करेगी तो मामले में कई अनियमितताएं उजागर होने की संभावनाएं जताई जा रही है