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‘ईश्वर’ की ‘न्याय प्रणाली’ को ‘गदा’ दिखाता है.!! जानिए इस ‘चुनाव चिन्ह’ का ‘महत्व’….

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का तड़का लगयचुका है, जहां चुनाव चिन्ह से शास्त्र ध्वनि की तलाश जारी है. शुभ-अशुभ के खेल में ‘पोंगापंडित’ भी नीजी स्वार्थ या दक्षिणा की अपेक्षा में प्रत्याशी को लुभावन पुजापाठ करवाने या यूं हीं ज्ञान बांटकर अपनी-अपनी मंडी सजाए हैं. विभिन्न पंडित के भिन्न-भिन्न तर्क है हालांकि चुनावी माहौल में तड़का लगाए हुए है..इन्हीं चुनाव चिन्हों में से सर्वश्रेष्ठ चर्चा में ‘गदा’ है, जिसका पौराणिक महत्व भी श्रेष्ठवान है..✍️
गौरतलब है कि गदा जो विष्‍णु जी के हाथ में होता है उसे बल और शक्ति के रूप में माना गया है. दुष्टों के लिए जहां ‘गदा’ भय की तरह काम करता है, वहीं ‘रक्षा का प्रतीक’ यह गदा ‘सज्जनों के लिए’ होता है. पौराणिक महत्व है कि ईश्वर की न्याय प्रणाली को गदा दिखाता है. शास्त्रों में हनुमान जी को दस आयुधों से अलंकृत कहा गया है. हनुमान जी के आयुधों की व्याख्‍या में खड्ग, त्रिशूल, खट्वांग, पाश, पर्वत, अंकुश, स्तम्भ, मुष्टि, गदा और वृक्ष हैं. हनुमान जी का बायां हाथ गदा से युक्त कहा गया है. ‘वामहस्तगदायुक्तम्’. श्री लक्ष्‍मण और रावण के बीच युद्ध में हनुमान जी ने रावण के साथ युद्ध में गदा का प्रयोग किया था. उन्होंने गदा के प्रहार से ही रावण के रथ को खंडित किया था. स्कंदपुराण में हनुमान जी को वज्रायुध धारण करने वाला कहकर उनको नमस्कार किया गया है. उनके हाथ में वज्र सदा विराजमान रहता है. अशोक वाटिका में हनुमान जी ने राक्षसों के संहार के लिए वृक्ष की डाली का उपयोग किया था. हनुमान जी का एक अस्त्र उनकी पूंछ भी है. अपनी मुष्टिप्रहार से उन्होंने कई दुष्‍टों का संहार किया है।

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