सरकार भले ही गौवंश के संरक्षण के लिए हर जिले गौ आश्रय स्थल बनाकर गायों को रहने और खाने की व्यवस्था की बात करती है लेकिन स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार लोग अपने मनमानी पूर्ण कार्य से बाज नही आते है. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भदोही जनपद के भी कई गौ आश्रय केंद्र में देखा जा सकता है, जहां अधिकांश नेता-अधिकारी सिर्फ सियासत व भ्रष्टाचार की महफिलें सजाकर बैठे हैं. ऐसे में भूख से तड़पती या मरी पड़ी गौमाता के हित में मिलती शिकायतों पर भी कोई जागने को तैयार नही है।
एक ऐसा ही ताजा मामला भदोही जनपद के ऊंज थाना क्षेत्र के मीनापुर में बने अस्थायी गौ आश्रय स्थल में देखने को मिल रहा है, जहां पर लापरवाही और मनमानी की सारे हदें पार की जा रही है। मीनापुर गौ आश्रय स्थल में गायों को साफ पानी नही दिया जाता है। देखभाल सही से नही किया जा रहा है। आये दिन गायें मौत की मुंह में समा जा रही है। स्थानीय लोगों के कहने के बावजूद भी जिम्मेदार मौन साधे है और मनमानी पूर्ण कार्य कर रहे हैं। इस गौशाला में गाये भूख या बीमारी से मर रही है. एक खुलासा और हुआ कि इस गौशाला में बिलखती गायों के इलाज के बजाय सुई लगा दी जाती है, जिससे गायें मर जाये। फिर भी सत्ता-शासन में बैठे जिले के जिम्मेदार इस तरह के कुकृत्यों में लिप्त लोगों पर कार्यवाही नही कर रहे है।
फिलहाल इस समस्या से परेशान होकर मीनापुर के निवासी समाजसेवी अनिल तिवारी ने बुधवार को जिलाधिकारी को पत्रक देकर उस गौशाला की समस्या के बारे में बताया तथा त्वरित सुव्यवस्था निश्चित करने के साथ जांच करवाने हेतु मांग की। हालांकि मीनापुर गौशाला तो एक उदाहरण मात्र है. जिले में बने सभी गौ आश्रय स्थल केवल खानापूर्ति से और राम भरोसे चल रहे है। ग्राम स्तर से लेकर जिलास्तर के लोग केवल खानापूर्ति में जुटे है। यदि जिलास्तर के लोग तटस्थ होते तो स्थानीय स्तर के जिम्मेदारों की क्या मजाल कि कोई शासन के दिशा निर्देश की अवहेलना करें। इस समय जिले में बने गौ आश्रय स्थल गौहत्या केन्द्र बनते नजर आ रहे है। फिर भी योगीराज की खुशामद करने वाले सत्तादल के नेता व अधिकारी मौन वंशीधर बने हैं। शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी समयानुसार ध्यान नहीं दिए जाने से योगीराज की यह योजना केवल कागज पर खुशहाल व हिंदूओं की नजर में भूख से बिलखती और मरती गौमाता..इसका भी असर आगामी 2022 चुनाव में दिखना तय माना सकता है।

