कोरोना की महामारी में कल्याणकारी कार्य के नाम पर भले ही आप की नजरें संस्था व समाजसेवी तक सीमित रह जाय लेकिन सशक्त परदेशियों की भूमिका नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ‘सशक्त परदेशी’ धारावाहिक की इस कड़ी में पढ़िये सभाजीत मिश्रा के बारे में, जिन्होनें सैकड़ो चूल्हों में संजीवनी नहीं फूंका बल्कि अलख ज्योति जला दी।
गौरतलब है कि कोरोना महामारी के शुरूआती क्षण से ही कुछ लोग सक्रियता दिखा रहे थे लेकिन उन्हें भी एहसास ही नहीं था कि यह बवंडर गरीबों के चूल्हे तक पहुंच जायेगा। कुछ ऐसा ही अनुभव रहा एक ‘सशक्त परदेशी’ सभाजीत मिश्रा का, जोकि मुंबई के प्रवेशद्वार कल्याण नगरी में वर्षों से सपरिवार रहते हैं। मुलत: भदोही जनपद के सीतामढ़ी (बनकट) की मिट्टी में जन्में सभाजीत मिश्रा का बचपन समीप के गंगा तट की निर्छल धारा को देखते बीता, जोकि स्व. बद्री नारायण मिश्रा के तीन बेटों में यह मंझले हैं। सन् १९७९ में कर्मभूमि बतौर मुंबई से नाता जुड़ा, जिसके बाद संघर्ष व मुसीबत की लहरों में सामंजस्य बैठाते हुये गंगा की निर्मलता और निर्छलता से प्रेरित रहें लेकिन यहां समुंद्र के खारेपन का भी प्रभाव पड़ा। आज स्वयं स्थापित ‘सुप्रीम फ्रेट कैरियर्स’ ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक हैं। ट्रांसपोर्ट बिजनेस विशेष पैठ रखने वाली इनकी कंपनी का नाम महाराष्ट्र में IBA सत्यापित करीबन 150 की सुची में विशेष स्थान रखती है। ठाणे मुख्यालय के साथ बड़ोदरा, सुरत व पुना जैसे कई शहरों में ब्रांच भी स्थापित है।
सेनिटाईजर से शुरुआत – कोरोना महामारी के शुरूआती दौर में कंपनी के सैकड़ो कर्मचारियों को सेनिटाईजर सहित अन्य सुरक्षा कवच मुहैया करवाया, जिसके बाद मुख्यालय ठाणे से कल्याण लौटते हुये ठाणे स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों सहित यात्रियों में सेनिटाईजर बांटकर जागरूकता फैलाने का अनुभव लिया। इसके बाद लाॅकडाऊन ने ऐसा झकझोरा कि अन्नदान की एक चिंगारी ने सैकड़ो की चूल्हों में कब अलख ज्योति जल गई, यह इन्ह्हें ही नहीं पता।
अनोखी सोशल डिस्टेन्सिंग – सभाजीत मिश्रा तो बिना तस्वीर लाॅकडाऊन में २० परिवारों को ‘पूर्ण मासिक अन्नपूर्णा’ व्यवस्था की घोषणा किये लेकिन यह संख्या १२० परिवारों से ज्यादा की हो गई। फिर भी विचलित नहीं हुये और इसे सौभाग्य समझते हुये 10 किलो गेहूं, 7 किलो चावल, 2 किलो दाल, नमक, मसाला, चायपत्ती इत्यादि का पैकिंग कल्याण की एक दुकान पर करवाकर, वहीं जरूरतमंदों को बारी-बारी से ५ दिनों में भेज दिया। इससे उक्त जरूरतमंदों की जहां जरूरते पूरी हुई, वहीं तस्वीर के चक्कर में ना मानवता तार-तार हुई और नाहीं सोशल डिस्टेन्सिंग की समस्या उत्पन्न हुई।

घरपोच व्यवस्था – कल्याण की गलियों में रहने वाले स्थानीय लोग व्यवस्था तो पा गये लेकिन जब बगल के आंबीवली से लाॅकडाऊन में फंसे एक पंडितजी की घंटी बजी तो, उन्हीं के क्षेत्र के एक करीबी की मदद से उन्हें राशन सामग्री मुहैया करवा दिया। उक्त दुकान का बिल online भर दिया। ऐसे में ठाणे शहर में फंसे सीतामढ़ी गांव के कुछ रिक्शा ड्राइवरों की घंटी बजी तो, लााॅकडाऊन में ७ हजार सहयोग धनराशि भेजकर सभी को राशन मुहैया करवाया।
फेसबुक पर संज्ञान – फिलहाल फेसबुक पर ‘सशक्त समाज न्यूज’ स्तंभकार सुनील तिवारी के फेसबुक पोस्ट पर एक भदोही युवा ‘पांडे’ मजबूरी प्रकट कर रहा था तो, बिना सुचना सभाजीत मिश्रा ने उसका हाल-चाल काल करके लिया। यहां पता चला कि वो जन्मभूमि सीतामढ़ी के बगल कोईरौना का है और ठाणे में रिक्शा चालक है, रोजाना की कमाई बंद से परिवार भूख से तड़पन की ओर है तो, उक्त शहर में भी एक करीबी को १५ सौ रूपये भेजकर अन्न व खाद्य सामग्री मुहैया करवाया।
‘अनुज’ बना ‘चेतक‘ – ‘सशक्त समाज न्यूज’ के पास उपरोक्त सभी राहत कार्य के बिल-बाऊचर उपलब्ध हैं लेकिन तलाश यह थी कि कार्य शुभारंभ की चेतना कहां से जगी। सभाजीत मिश्रा बताते हैं कि उनके छोटे बेटे अनुज मिश्रा जोकि ‘सुप्रीम फ्रेट कैरियर्स’ कैरियर के मैनेजर फाइनेंस भी हैं, उन्होंने पीएम कोष में डोनेट का प्रस्ताव रखा था। फिलहाल उपरोक्त अन्नदान व खाद्य सामग्री के साथ प्रधानमंत्री कोष में 11हजार, मुख्यमंत्री कोष में – 5100 के साथ स्वामी राम भद्राचार्य (गुरूजी) के भी कोष में 11हजार वनवासियों हेतु भोजन वितरण मुहिम में सफलता पूर्वक धनराशि ट्रांसफर करने की सफलता हांसिल हुई।



