भाजपा जिलाध्यक्ष (०१) – संगठन जीता, विधायक-सांसद हारे.!

भदोही जनपद से उठी लोकतांत्रिक संगठनात्मक पारदर्शिता की मांग को भाजपा संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों ने सर्वश्रेष्ठ निभा दिया। इससे भी सर्वश्रेष्ठ गरिमामयी तथ्य यह भी समक्ष है कि ५५ उमीद्वारों में से मनोनीत नये जिलाध्यक्ष को विनय श्रीवास्तव को अन्य उमीद्वार भी खुशमय बधाई देते नजर आ रहे हैं। वैसे तीनों विधान सभा क्षेत्र के विधायकी प्रत्याशियों की संख्या के कुल योग से ज्यादा ५५ प्रत्याशी मैदान में थे तो तीनों विधायकों से भी ज्यादा सम्मान व बधाईंया भी मिलना लाजमीं है।

प्रतिक्रिया sashaktsamaaj@gmail.com पर दीजिये और हिंदी में होने पर सशब्द प्रकाशित किया जायेगा….

गौरतलब है कि जितना मलाल पंचनिष्ठा मंथनकारों को जिलाध्यक्ष नहीं बनने का नहीं है, उससे ज्यादा विधायक-सांसद के दरबारियों को आंतरिक हृदयघात है। आखिरकार यह होना भी चाहिये क्योंकि प्रस्तावक वगैरह की व्यवस्था तो ठीक है लेकिन जब लोकतांत्रिक पद्धति से उच्च दरबार में सेटिंग का समय आया तो विधायक-सांसद हार गये। भाजपा संगठन ने यहीं विधायक-सांसद को एहसास भी दिला दिया कि संगठन पदाधिकारियों की गुलामी विधायक व सांसद को करनी पड़ेगी क्योंकि यही संगठन के पदाधिकारी-कार्यकर्ता व पुश्तैनी भाजपाई घर-घर की गुलामी करके सपनों का विकास महल दिखाकर वोट भाजपा की झोली में डलवाते हैं और सत्ता शीर्ष ‘योगीजी-मोदीजी’ भी कर्मठता दिखाते हैं तब कहीं जाकर विधायक या सांसद जीत पाते हैं। जो विधायक-सांसद अधीनस्थ क्षेत्रिय मतदाताओं को किये वादे भूल जाते हैं, वही अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाते हैं। ऐसे में चंद दरबारियों के सहारे भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर बम-बम बोलते हुये ‘पंचनिष्ठा’ दरकिनार करते हैं। जगजाहिर है कि भदोही जनपद के दोनों विधायक या सांसद भाजपा की शरण में अचानक आकर कैसे जीते हैं। जब चंद पदाधिकारियों के साथ आंतरिक लीला में ही विधायकों को विकास दिखता हो और अधिकांश पदाधिकारी या पुश्तैनी भाजपाई सार्वजनिक विकास कार्य की धीमी गति या भ्रष्टाचार देख क्षेत्रिय जनता छोड़िये बल्कि मतदाताओं की कराह झेल रहे हों, तब आखिरकार उन गलियों में भविष्यत खुशमय वोट के लिये फेरी कैसे डालेगें। यहां कहावत चरितार्थ हो रही है कि ‘दूध का जला छांछ भी फूंककर’ पीता है तो टिकट लेकर भले ही कोई पार्टी की उपलब्धियों के दम पर जीत जाये लेकिन दूबारा जनता के समक्ष पहुंचने हेतु पारदर्शिता पूर्ण सार्वजनिक विकास कार्य का नीजी रिकार्ड भी होना जरूरी है। खैर..कोई बात नहीं क्योंकि अब यदि नये जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव के मनोयन से स्थानीय भाजपाई खुश हैं तो यह उनके सिर का दर्द है कि निर्वाचित विधायकों के किस कार्य को लेकर जनता के समक्ष जायेगें।

यह भी पढ़िये 👉 भदोही कंठ (०२) – भ्रष्टाचार बोले तो बिगड़ा हुआ आचरण पढ़िये, अंतरराष्ट्रीय मुद्दा.. 

खबरें पढ़ने के साथ tiwarisunil@outlook.com पर प्रतिक्रिया भी देते रहिये..✍️

Leave a Reply

Discover more from सशक्त समाज न्यूज़

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading