जिंदगी और मौत के बीच, देवदूत बनी एनडीआरएफ टीम.!

विपुल पाण्डेय ब्यूरो रिपोर्ट    :-                              महाराष्ट्र में महालक्ष्मी एक्सप्रेस को बदलापुर और वांगनी के बीच रोकने के बाद करीबन १० घंटे रेल यात्री जिंदगी-मौत के बीच फंसे रहें लेकिन अब स्थिति राहत बचाव से सामान्य होती नजर आ रही है. ट्रैक पर पानी भरने की वजह से इस ट्रेन को रोका गया था.
गौरतलब है कि सेंट्रल रेलवे ने महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों से अपील करते हुए कहा था कि वह ट्रेन से नीचे ना उतरें, ट्रेन सुरक्षित है.ट्रेन के रोके जाने के कारण उसमें यात्रा कर रहे करीब 700 यात्री फंस गए. एनडीआरएफ की टीम मौके पर रवाना होकर पहूंची। इस बीच सेंट्रल रेलवे के डिविजनल रेलवे मैनेजर ने बचाव दल को ट्रेन में फंसे यात्रियों को निकालने के निर्देश दिए. मौके पर एनडीआरएफ की 8 टीमों ने राहत एवं बचाव के लिए 3 नावों का सदुपयोग करते हुये करीबन सफलता हासिल कर ली है। अब यात्रियों को भले ही दुर्दशापूर्ण १० मिनट पैदल चलकर जाना पड़ रहा है और आफत में भूख-प्यास की दास्तां रेल यात्री बयां कर रहे हैं लेकिन एनडीआरएफ टीम को किसी देवदूत से कम नहीं आंका जा रहा है।

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