दरोगाजी के ‘इश्कजश्न’ पर, थानेदार का ‘छापा’, रोमांस में ‘खबरी’ हमराही….
इश्कबाजी पर भले पहरा हो, लेकिन दिल में जब जश्न गहरा हो, तब अश्क की प्यास बुझानी पड़ती है. कुएं और समंदर में डूबते हैं हजारों, हम प्रेम में मदमस्त हुए तो हमें डूबानें ‘हमराही’ हंगामा लेकर आ गए…कुछ यही शायद गुनगुना रहे हों दरोगाजी क्योंकि ‘चैट’ से ‘मैट’ तक ‘उसकी’ भी ‘रजामंदी’ थी लेकिन…


