हिन्दी का ज्ञान है…तो जरूर पढ़िए…’दलाल’ और ‘एजेंट’ में, होता है यह फर्क.!!
आजकल फेसबुकिया सियासत गर्म है. जैसे महाभारत हो रहा हो और सब काल का कपाल लिए डटे हों…वैसे ‘फेसबुकिया मंडी’ के नेता बिना किसी ‘पद’ भी ‘क्षेत्र’ से ‘दिल्ली’ तक हिलाते नजर आते हैं. ‘यह बात अलग है कि उनके कहने से उनके घर की वोट नहीं हिलती, तो दिल्ली के नेता कैसे हिलते होगें..?’…
