पत्रकारों की एक बैठक में भदोही जिले के पत्रकार जयशंकर दूबे से अधिकांश उनके साथ खबरों के मैदान मिलने वाले स्थानीय पत्रकार साथी याद कर रहे हैं. जहां शेष बची सिर्फ यादों के सहारे श्रद्धांजलि देकर स्वयं को भी सांत्वना दे रहे हैं, वहीं पत्रकार परिवार के समक्ष शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए दुख-दर्द को बांटने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन दुर्घटना के बाद जयशंकर दुबे की अकस्मात मौत ने इस क्षण को झकझोर सा दिया है।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्थानीय पत्रकार संतोष तिवारी जहां कहते हैं कि ‘भदोही जनपद के पत्रकारिता जगत में जयशंकर दुबे की कमी को कभी पूरा नही किया जा सकता है क्योंकि वे हमेशा गरीब और जरूरतमंद की आवाज को उठाते रहे और पत्रकारों के साथ भी हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर रहते थे. अपनी पत्रकारिता के दौरान उन्होंने जिले भर में एक अलग छाप छोड़ी है. चाहे अधिकारियों से बात करनी हो या नेता से, हमेशा जयशंकर दुबे बढ़कर आगे रहते और अपने बेबाक सवालों को जरूर पूछते…सदैव ही पत्रकारों के हितों के लिए खडे़ रहते थे लेकिन दुर्भाग्यवश एक सड़क दुर्घटना में जयशंकर दुबे इस दुनिया को अलविदा कहकर चल दिये जो पत्रकारिता जगत में अपूरणीय क्षति है।’ वहीं पत्रकार अंकित पाण्डेय ने भी निधन पर शोक जताते हुए कहा कि ‘जयशंकर दुबे पत्रकारिता की शान रहे और उनके चले जाने से भारी कमी महसूस हो रही है।इसी तरह ‘सशक्त समाज न्यूज’ के वर्तमान औराई ब्यूरो प्रदीप दूबे (विक्की) ने भी जयशंकर दुबे को एक जाबांज और निष्पक्ष पत्रकार बताते हुए श्रद्धांजलि दी और हमेशा उनकी कमी खलने की बात कही। अंतत: पत्रकार मनीष पाण्डेय ने भदोही में पत्रकारिता की शान की संज्ञा देते हुए श्रद्धांजलि दी, वहीं पत्रकार साथी ए के फारूखी, उमेश सिंह, दिलीप दूबे, दिनेश यादव, सूरज शुक्ला, उमेश दूबे, गौरव पुरी, देवेश पाण्डेय समेत काफी लोग उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि देते हुए गमगीन होकर यादें सांझा की।
बताया जा रहा है कि 29 जनवरी को अपरांन्ह 2 बजे थाना क्षेत्र गोपीगंज अंतर्गत कौलापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग हाईवे ओवरब्रिज पर कथित दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के उपचार से ट्रामा सेंटर ले जाया गया था, लेकिन किडनी में गम्भीर चोट के कारण जिंदगी और मौत से जूझते हुए शनिवार की भोर उन्होंने इस जहां को अलविदा कहकर हजारों लोगों में शोक की लहर उत्पन्न कर दी. अपनी पढ़ाई पर पूरी करने के बाद से ही जयशंकर दुबे ने राजनीति के पश्चात पत्रकारिता में कदम रख दिया था। उन्होंने अपने बड़े भाई भदोही के चर्चित वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश दुबे की प्रेरणा से न्यूज पोर्टल ‘सर्किल’ पर विगत् लगभग दो वर्षों में खेत-खलिहान से गांव-गलियों ही नहीं अपितु कलेक्ट्रेट से राजनीतिक गलियारे तक की अमिट खबरें समेटा।