कल्याण-डोंबीवली मनपा में एकमेंव उत्तर भारतीय (हिन्दी भाषी) नगर सेवक मनोज राय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है. चुनाव करीब आते ही चौतरफा विपक्षी दल तो छोड़िए, उनके कुछ करीबी उत्तर भारतीय नेता भी अंदरुनी रूप से उनकी खिलाफत में भूमिपुत्रों के साथ मिलकर कानूनी दांवपेंच खेल रहे हैं।
पिछले दिनों अचानक मीडिया में खबरें नजर आ रही है कि “नगरसेवक मनोज राय के खिलाफ कोरोना काल में बिना सोशल डिस्टेंसिंग कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में घुसकर सरकारी काम में अड़चन, बिना इजाजत जमावबंदी और पुलिस अधिकारी को धमकाने का मामला दर्ज है, मगर थाने में सरेआमं बेइज्जत होने वाली कोलसेवाड़ी पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है। बतादें कि कल्याण (पूर्व) के बिल्डर व बीजेपी नगरसेवक मनोज राय ने शुक्रवार १४ अगस्त के दिन अपने सहयोगियों से मिलकर भूमिपुत्र राहुल पाटील नामक युवा की पहले पिटाई की और खुद थाने में रपट लिखवाने पहुँच गए। जब काफी देर तक रपट नहीं लिखी गई तो भाजपा विधायक गणपत गायकवाड सहित अन्य नेताओं को बुलाकर थाने में हंगामा किया। यहां तक कि थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शाहूराज सालवे की बेइज्जती कर धमकी भी दिया। उस समय कोलसेवाड़ी पुलिस ने पुलिस स्टेशन में घुसकर सरकारी काम में अड़चन, बिना इजाजत जमावबंदी और पुलिस अधिकारी को धमकाने के मामले में नगरसेवक मनोज राय सहित आधा दर्जन लोगों पर मुकदमा दर्ज तो किया लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। बताया जाता है कि अभी तक अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बावजूद भी बीजेपी नगरसेवक मनोज राय सहित कई अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और बेइज्जत होने वाली कोलसेवाड़ी पुलिस कुम्भकर्णी नींद में सो रही है। वही इस बात की चर्चा है कि रसूखदार होने के नाते गिरफ्तारी नही हो रही है. अगर ऐसी घटना किसी अन्य व्यक्ति से हो तो तुरंत गिरफ्तारी होती। कानूनी जानकारों का मानना है कि कानूनी मर्यादा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता पूर्ण करवाई भी होना जरूरी है।’



