उत्तर प्रदेश की सियासत चाहे जैसे चले लेकिन कुटनीति व साजिशों का बखेरा खड़ा रहता है. ऐसे में पुर्वांचल का केंद्र कहा जाने वाला भदोही जनपद भी इससे अछूता नहीं है. यहां भी सियासत साजिशों के दौर में चलती है. राजनीतिक प्रतिद्वंदी से सत्ताधारी व भावी प्रत्याशी ‘साजिश एँ कबड्डी’ तो खेलते ही हैं लेकिन जमीन-जायदाद के मामलों पर भी हिस्सेदारों को ‘सत्ता की हनक’ में फर्जी आरोप FIR देने से पीछे नहीं हटते हैं. जी हाँ…फर्जी मुकदमें के प्रहार से बचने वालों के लिए अब एक बार फिर से बूरी खबर है क्योंकि एससी-एसटी मुकदमें के जाल में कैद करवानें की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
गौरतलब है कि भदोही जनपद में आगामी 1 साल कुछ चुनावी व सत्ताधारी नेताओं के विरोधियों के लिए संकट भरा होगा. जिला पंचायत, ब्लाक प्रमुख व ग्राम प्रधानी के लिए सत्तादंभी ब्राम्हण नेता अपने विरोधियों पर ‘एससी-एसटी’ मुकदमें की साजिशन तैयारी कर रहे हैं. इस जाल फंसाए जाने के वाले सिर्फ राजनीतिक विरोधी ही नहीं होगें बल्कि वे भी निशाने पर हैं, जो जमीन-जायदाद को लेकर किसी सत्ताधारी पहुंच वाले करीबी नेताओं से कानून न्याय पाने हेतु न्यायालयीन केस लड़ रहे हों और समझाएं जाने पर भी मौन बैठने को तैयार न हो. ऐसे में आखिरकार नेताजी भी क्या करें..? क्योंकि चुनावी-चुनौती में उनकी भी मजबूरी है. उक्त चुनावी दौर में यदि यही विरोधी जेल से बाहर रहेंगे तो जमीन-जायदाद भले ही हाथ ना लगे लेकिन न्यायालय का कोई ऐसा आदेश ला सकते हैं, जिससे वोट बैंक तो टूटेगा ही लेकिन बखेरा खड़ा होने से टिकट कटना तो छोड़िए बल्कि जेल की हवा खानी पड़ी सकती है। ऐसी स्थिति में जितना रसूखदार नेता, उतनी ही बड़ी साजिश का खेल खेला जाना तय है। विश्वत सुत्रों की मानें तो इसी खेल के लिए सफेदपोश नेताओं ने एससी-एसटी महिलाओं व परिवार की तलाश करना शुरू कर दिया है, जो मुकदमा लिखवा दे बस और बाकी काम सत्ताधारी नेता खुद सलटा देगें।
डेढ़ लाख ले लो, बयान दे दो… कुछ सफेदपोश सत्ताधारी नेता तो जिन्हें फर्जी आरोप FIR से नहीं हरा पाए, उनके लिए ‘डेढ़ लाख ले लो, बयान दे दो..’ वाली स्कीम लिए घूम रहे हैं. विश्वस्त सुत्रों के मुताबिक इस बार विशेष विरोधी के लिए लाखों खर्च भी करनें को तैयार है. डेढ़ लाख उक्त एससी-एसटी परिवार को देने को तैयार हैं, जो उनके विरोधी पर मुकदमा लिखवाने को तैयार हो जाय. हाँ..इस खेल में विरोधी पहले पुलिस की सतर्क विवेचना से बच गए हैं, इसलिए १६४ के तहत बयान भी देने की शर्त रखी जा रही है. जनपद के सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र में एक ऐसा ही सौदा तैयार था लेकिन अचानक लालच में आकर मुकदमा करवाने बजाय उक्त एससी परिवार परदेश लौट गया. इतना ही नहीं बल्कि सत्ताधारी ब्राम्हण नेता जिस ब्राम्हण पर मुकदमा करवानें के लिए उक्त एससी परिवार को तैयार कर रहे थे, उसी ब्राम्हण को पैलगी करके उक्त परिवार ने लौटते-लौटते साजिश भी बता दिया.
एससी-एसटी साजिश फेल..भदोही जनपद में फिलहाल अभी तक के साजिशन एससी-एसटी मुकदमों पर नजर डालें तो अधिकांश मुकदमों में किसी ऊंची पैठ वाले सत्तााधारी जनप्रतिनिधि या ब्राह्मण नेता का अप्रत्यक्ष हाथ होने की चर्चा रही है, जिसे भदोही पुलिस के उच्चाधिकारी सटीक भांप गए. इतना ही नहीं बल्कि इन मामलों की विवेचना-जांच सीओ स्तरीय होती है, जिसमें अधिकारियों ने कर्तव्यनिष्ठा का बड़ी बारीकी से परिचय देते हुए बेगुनाहों को क्लीनचिट देकर बेवजह साजिशन सलाखों में जाने से बचा लिया।
जान बची लाखों पाएं…एससी-एसटी के मुकदमें से क्लीनचिट मिलने के बाद ‘जान बची लाखों पाएं..’ की तर्ज पर फंसे हुए लोग बैकफूट पर आ गए और झूठी रिपोर्ट लिखवाने वाले पर कार्यवाही नहीं करवाए, जिसकी वजह से इस खेल के मास्टरमाइंड सफेदपोश नेताओं का मनोबल नहीं टूटा। ऐसे में भले ही कानूनी शिकंजे से सत्य जीत आए लोग थकहार बैठ गए लेकिन खिलाड़ी गहरी साजिश के तहत नए-पुराने विरोधियों पर एससी-एसटी दांव अजमाने की तैयारी में फिर एक बार बेताब हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनावी दौर फर्जी आरोप मुकदमों से कितने बेगुनाहों की रक्षा स्थानीय पुलिस कर्त्तव्यनिष्ठता से कर पाती है।



