सरकार भले ही कोई नियम-कानून बना दे लेकिन उसका पालन करने के लिए शासनिक माहौल नहीं बन पाता है। भदोही जिला कलेक्ट्रेट भी इससे अछूता नही है, जहां पर दीवारों पर साफ-साफ लिखा है कि पान-गुटखा खाने पर जुर्माना लगेगा लेकिन आम आदमी के अलावा कलेक्ट्रेट में तैनात कर्मी भी खुलेआमं पान-गुटखा का सेवन करते हैं। यही मजबूरी कोरोना काल में शायद बिना मास्क शासनिक सेवा भी देने पर मजबूर कर रही है।
जगजाहिर है कि इस कोरोना काल में जहां लाखों-करोड़ों खर्च करके राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवा रही है, वहीं शासनिक कार्यालयों में भी प्रवेश करने से पहले मास्क लगाने की अनिवार्यता पर जोर देती रही है। इससे शासनिक सेवा दे रहे कर्मचारियों व अधिकारियों को संक्रमण से बचाने का भी ध्येय है क्योंकि कई सरकारी कार्यालयों में कोरोना संक्रमण ने पैठ करके विगत् दिनों में कामकाज को प्रभावित किया है। फिलहाल भदोही जिला कलेक्ट्रेट का नजारा देखकर यही सवाल पैदा होता है कि यदि शासनिक-प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी ही जागरूक नहीं रहेगें तो जिला वासियों को नियम-कानून का पालन कराने में सख्ती कैसे दिखा पाएगें.? क्या भदोही में सिस्टम ऐसे ही चलता है.? कोरोना काल में यह खबर अलोचना हेतु नहीं है बल्कि बेहतरीन जागरूकता अभियान की झलक शासनिक कार्यालयों से ही ज्योति-अलख बने. बस इसीलिए ध्यानाकर्षक का प्रयास है।



