भदोही में पिछले कुछ महीनों से ‘भूचाली सियासत’ खुलेआमं जारी है, जिसके लिए मोहरे भी दमदार मैदान में उतरते रहे या उतारे गए. यह तो विकास कार्य प्रेमी जनता बखूबी समझती है. खैर…इस बार ‘भूचाली मोहरा’ कोई और नहीं बल्कि पिछले दिनों तक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को मसीहा बताने वाला उनका रिश्तेदार ही रहा. फिलहाल दो दिनों से मचे भूचाल के पीछे 32 करोड़ की रहस्यमयी देनदारी का पेंच सामने आया है..✍️
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से बाहुबली विधायक विजय मिश्रा सियासी विरोधियों द्वारा साजिश रचने का खुलासा करते रहें हैं लेकिन उनका ही वर्षों से खासम-खास कहे जाने वाला सबसे विश्वस्त, रिश्तेदार ही साजिशकर्ताओं की टोली में अचानक शामिल हो जाएगा. ऐसा किसी के पल्ले नहीं पड़ रहा था. जगजाहिर है सियासी व व्यापारिक विरोधी खेमें में बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का यही खासम-खास उनका सबसे करीबी गुर्गा बतौर भी चर्चा में रहा है। फिर भी धीरे-धीरे कुछ परतें खुल रही हैं। कृष्ण मोहन तिवारी उर्फ मुन्ना द्वारा लिखाये गए मुकदमें केे बाद विधायक विजय मिश्रा ने जहां अपने खासम-खास को सियासी विरोधियों का मोहरा शुक्रवार को सिद्ध कर दिया, वहीं उक्त मुकदमें में नामजद हुए विधायक विजय मिश्रा के पुत्र विष्णु मिश्रा ने भी शनिवार को कई बिंदुओं पर अपनी पीड़ा और इस मामले के पीछे का छिपे रहस्य को खोला।
देनदारी ‘बाऊंस चेक’ दिखाते हुए विष्णु मिश्रा…
विष्णु मिश्रा ने कहा कि हमारे परिवार पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं, हमनें इनके साथ कोई भी जोर-जबर्दस्ती नही की है। यह अपनी फर्म के होलसोल प्रोपराइटर हैं। हमनें इनके ठेका कार्य में सफेद गिट्टी, काली गिट्टी, जॉब वर्क आदि में जो प्रोजेक्ट में 5% सिक्युरिटी मनी जमा होती है, उसमें भी हमनें अपना दिल्ली का मकान गिरवी रखकर व मकान के किराए का एडवांस रुपया देकर मदद की और उक्त ठेका कार्य दिलवाने में सहयोग किया. अगर ऐसा ना करते तो उनको ठेका नहीं मिल पाता। यह इनकी बात बेबुनियाद है कि हम इनकी फर्म को टेकओवर करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि प्रोपराइटर फर्म एक इंसान से शुरू होता है और उसी इंसान पर का खत्म हो जाता है। अगर हमनें ऐसा किया तो आज तक किसी विभाग से कोई शिकायतें क्यों नहीं की गई, जबकि पेमेंट तो वही से आना था। अगर हम इनकी फर्म को टेकओवर कर लिए होते तो उसका टैक्स नही जमा होता तो सरकार इनकों खोजती। पर आज 19 सालों के बाद यह बात क्यों पैदा हुई..? वह इसलिए क्योंकि 32 करोड़ रुपये अब इन्हें हमारी कंपनियों के मेटेरियल सहित अन्य देनदारी बाकी है।
हमारे उपर कोई आपराधिक मामला आज तक नही है। हमनें अपनी पढ़ाई देहरादून से लेकर अमेरिका तक में की. 2012 में मैं पहली बार अपने पिता के चुनाव में सहयोग करने के लिए आया और जनता से वादा किया था कि विधानसभा क्षेत्र के किसी भी नागरिक को कोई परेशानी उत्पन्न नहीं होने दूंगा. आप यह ना सोचे कि मैं आज आया हूं और कल फिर चला जाऊंगाा. इसी तरीके का वादा मैंने 2017 में भी किया था और अपने वादे को पूरा खरा उतरा हूं और आज क्षेत्र की कोई जनता में से कोई यह बात को नहीं कह सकता कि जो हमनें वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया। (LOCAL INPUT BY यूपी ब्यूरो- विशाल तिवारी के साथ अंकित पांडेय) संलग्न विडियो अवश्य देखिए….https://youtu.be/e_aA-t0hSEE

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