प्रवासी श्रमिकों में – सीएम ने फूंकी संजीवनी, जानिये स्पेशल ट्रेन की मांग, स्वास्थ्य जांच के साथ क्वारटींन भी…महाराष्ट्र में प्रवासी श्रमिकों को निरंतर सांत्वना देने वाले सीएम उद्धव ठाकरे ने आखिरकार संजीवनी फूंक ही दिया, जिसके तहत उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष ट्रेन की व्यवस्था हेतु मांग की है। ऐसे में तय है कि प्रधानमंत्री की हरी झंडी आते ही, मजबूरन दूूूर-दराज लाॅकडाऊन में फंसे मजदूर अपने गांव की मिट्टी में परिवार तक पहुंचने लगेगें।
गौरतलब है कि प्रवासी श्रमिकों लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे निरंतर चिंतित रहें और उन्हें सांत्वना देकर रोकने का भरसक प्रयास भी किये। प्रवासी श्रमिकों में जो नहीं मान रहे उन्हें सुरक्षित उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था का भी आश्वासन दिया था। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेलवे मंत्रालय से जहां मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है, वहीं इस संबंध में अप्रैल के आखिर तक गाइड लाइन जारी करने की मांग की है। मिडिया रिपोर्टस के मुताबिक अतिरिक्त केंद्रीय सचिव मनोज जोशी की अध्यक्षता में पांच अधिकारियों की टीम महाराष्ट्र आई हुई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उनसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान अन्य राज्यों के श्रमिकों को उनके गांव भिजवाने के लिए प्रबंध कराने की मांग की।
संचालित हैं राहत कैंप- महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में फंसे प्रवासी मजदूरों के आश्रय के लिए राहत कैंप बनाए हैं। मौजूदा समय में तकरीबन छह लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों और मजदूरों के रहने, भोजन और अन्य जरूरतों का प्रबंध राज्य सरकार की ओर से किया जा रहा है। हालांकि लोग अपने गांव जाना चाहते हैं।
आंदोलन और सांत्वना – मजदूर आंदोलन भी कर चुके हैं और उग्रता ना बढ़े…इसलिये मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भरोसा दिला चुके हैं कि जो मजदूर जहां फंसे हैं, वहीं रहें। उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद प्रवासी मजदूरों को उनके गांव भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
सीएमओ ने दी जानकारी – मुख्यमंत्री उद्धव ने फिर से केंद्र सरकार को प्रवासी मजदूरों को उनके गांव भिजवाने के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था करने की सिफारिश भेजी। मुख्यमंत्री के मुताबिक केंद्र सरकार का अनुमान है कि 30 अप्रैल से 15 मई तक कोरोना वायरस का प्रमाण और बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए क्या श्रमिकों को उनके मूल गांव में भेजने के लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था हो सकती है। परप्रांतीय नागरिकों को घर जाते समय शुरू से लेकर अंत तक (एंड टु एंड) मतलब उनका घर तक निरीक्षण किया जायें। वहां उनका क्वारंटाईन किया जाएगा तो वायरस नहीं बढ़ेगा। ऐसी व्यवस्था करके सावधानी पूर्वक उन्हें भेजा जाए। ऐसा विचार करके केंद्र सरकार समय पर निर्णय ले।
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