दिल को खटके,
जरा हटके…😜
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पुलिस में उच्च पदस्थ, निष्पक्ष कीर्तिकार
फिर भी उठे सवाल, सपना ‘कैसे’ साकार
सपना ‘कैसे’ साकार, राजनेता का है राज
बेटा’ लिखाये फर्जी, विवेचक गिराये गाज
कहे ‘बहुरूपीय’ मौन, लोकतंत्र का जूलूस
खाकी वर्दी सलाम, शपथ याद हमें पुलिस
एस. टी. ‘बहुरूपीय’ (९३२४००६२६९) आपका व्यंग्यकार, आपकी आवाज.
(स्तंभ वर्ष – १२) – पुस्तक प्रकाशन हेतु स्तंभ को ‘सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क पर संकलित किया जा रहा है


