‘व्यंग्य’ लिखने के लिये ‘निर्भीकता’ जरूरी, डाॅ. वागीश सारस्वत, शेखर अस्तित्व एवं पंकज प्रसून सम्मानित

अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के बारहवें राष्ट्रीय अधिवेशन में संस्था की ओर से सारेगामापा स्टूडियो में 3 फरवरी को अखिल भारतीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध व्यंग्यकार डा वागीश सारस्वत को व्यंग्य विभूति सम्मान-2019, गीतकार शेखर अस्तित्व को गीत गंगा सम्मान-2019 एवम लखनऊ के व्यंग्य कवि पंकज प्रसून को ‘व्यंग्य विभूषण सम्मान – 2019’ से नवाजा गया।

डा. वागीश सारस्वत ने कहा कि व्यंग्य लिखने के लिए निर्भीकता ज़रूरी होती है। पंकज प्रसून ने सुनाया- कुर्सी का पानी से गहरा नाता है, कुर्सी छिनते ही आंखों में पानी भर जाता है, कुर्सी मिलते ही आंखों का पानी भर जाता है। शेखर अस्तित्व ने अपने मशहूर गीत -‘”तीर थे कमान हो गए,कैसे बेजुबान हो गए, सिर्फ एक पान के लिए लोग पीकदान हो गए..” का सस्वर पाठ किया। इस अवसर पर दिल्ली के वरिष्ठ साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव, प्रवासी संसार के संपादक वरिष्ठ पत्रकार राकेश पांडे, संगीतकार सुधाकर स्नेह सहित मुम्बई एवं देश के कई शहरों से पधारे साहित्यकार एवम कवि उपस्थित रहे।

प्रेस विज्ञप्ति, प्रतिक्रिया sashaktsamaaj@gmail.com पर भेजिये, हिंदी Text टाईप किया हुआ आमंत्रित….

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