हमारे देश में लोकतंत्र की नींव ही भ्रष्टाचार के केंद्र में फंसी है। ऐसे में पारदर्शिता व भ्रष्टाचार मुक्ति हेतु ढ़िढ़ोरा पिटती सरकार का नुमाईंदो पर ही लगाम नहीं है। सरकारी विभागों में बैठे अधिकांश बाबू से अधिकारी तक कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबकी लगा रहे हैं। इससे भी बड़ा शर्मनाक तथ्य यह है कि विभिन्न सत्ताशीर्ष बैठे नेताओं को कुर्सी भी अधिकांशतः भ्रष्टाचारी विधायकों के दम पर टिकी है।

जगजाहिर है कि शहर से लेकर विभिन्न राज्यों के ग्रामीण इलाकों में यह भ्रष्टाचार किसी शिष्टाचार से कम नजर नहीं आ रहा है। शहरी इलाकों में जहां पुलिस विभाग के खाकी वर्दीधारी रिश्वतखोरी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के चढ़ते रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में राजस्व विभाग भी टक्कर में है। जैसे एकदूजे से रिकार्ड कह रहे हों कि हम किसी से कम नहीं और रिश्वतखोरी में गम नहीं। देश की आर्थिक राजधानी के प्रवेशद्वार की चौखट पर बात करें तो ठाणे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई कार्रवाई में इस वर्ष रिश्वतखोरी के ९० मामले उजागर हुए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा २० मामले पुलिस विभाग से जुड़े हुए हैं। राजस्व विभाग सहित सभी सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामले दर्ज हुए हैं। इसके साथ गिरफ्तारियां भी हुई है। रिश्वतखोरी के २० मामलों में २४ पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा दो दलालों को गिरफ्तार किया गया है। राजस्व विभाग दूसरे नंबर पर है। १५ रिश्वतखोरी के मामलों में इस विभाग के २१ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी तरह महापालिका-१०, महावितरण-८, जिलापरिषद-४, भूमि अभिलेख विभाग-३, सहकार विभाग-३, प्रादेशिक विभाग-३, सिडको, वन विभाग तथा आदिवासीr विभाग सहित सभी सरकारी विभागों में एसीबी की कार्रवाई हुई है। जनवरी २०१९ से ५ दिसंबर के बीच रिश्वतखोरी के जहां कुल ९० मामले दर्ज हुए हैं, वहीं वर्ष २०१८ में रिश्वतखोरी के कुल ९६ मामले दर्ज हुए थे यानी पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष ६ मामले कम दर्ज हुए हैं। अन्य खबर 👉भदोही कंठ (०४) भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के समर्थन में कूदा विधायक, भ्रष्टाचारियों के निशाने पर.!



