पुलिस बनाम राजस्व – हम किसी से ‘कम’ नहीं, रिश्वतखोरी का ‘गम’ नहीं.!

हमारे देश में लोकतंत्र की नींव ही भ्रष्टाचार के केंद्र में फंसी है। ऐसे में पारदर्शिता व भ्रष्टाचार मुक्ति हेतु ढ़िढ़ोरा पिटती सरकार का नुमाईंदो पर ही लगाम नहीं है। सरकारी विभागों में बैठे अधिकांश बाबू से अधिकारी तक कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डूबकी लगा रहे हैं। इससे भी बड़ा शर्मनाक तथ्य…

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‘कलंक’ से बचने के लिये ‘सिर कलम’ करके, बेटी को ऐसे जा रहा था दफनाने..

हर समाज की अपनी एक पुश्तैनी व सांस्कृतिक परंपरा है, जिस पर हर कोई आधुनिकता की डगरी चलकर भी जुड़ा रहना चाहता है। कई बार यहां आधुनिकता की शिक्षा में पाश्चात्य प्रथा की ओर नवपीढ़ी कदम बढ़ा देती है। इश्क-मोहब्बत का जंजाल सामाजिक पंचाईत में ‘कलंकी’ बना देता है, जिस ‘कलंक’ से बचने के लिए…

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