भदोही जनपद में भाजपा संगठन के ‘पंचनिष्ठा’ सिद्धांतों के इर्द-गिर्द ही नये जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव का वैचारिक कथावाचन जारी है। शायद यही कारण है कि विभिन्न निष्ठावान पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं सहित पुश्तैनी भाजपाई खुशियां-बधाईंयां सोशल मीडिया से घर व भदोही भाजपा मुख्यालय (जोरई) तक पाट दिये हैं।

जगजाहिर है कि सिद्धांतवादी विचारधारा ने ही भाजपा को सत्ता का ‘वटवृक्ष’ बनाया, जिसकी छांव में विधायक-सांसद फिलहाल पल रहे हैं। अन्य दलो से आकर भाजपा टिकट पर विधायक-सांसद बने अधिकांश जनप्रतिनीधि ही भाजपा की ‘पंचनिष्ठा’ से शायद परे हैं, जिसके कारण सिद्धांतवादी मुल भाजपाईंयों को संगठन से भी हलाकन झेलना पड़ा है। जमीनी स्तर पर कथनी-करनी में विधायक-सांसद विकास नीतियों पर कितना खरा उतर रहे हैं। यह तो आमं जनता छोड़िये बूथ अध्यक्ष ही बयां कर देगा। खैर..चलिये चर्चा करते हैं भदोही जनपद की, जहां जिलाध्यक्ष विनय श्रीवास्तव के ‘पंचनिष्ठा’ सिद्धांत कथावाचन से आकलन किया जा रहा है कि कहीं ना कहीं सेवाभावी राजनीति का युग लौटने वाला है। आइये मुख्य बिंदू में पढ़ते हैं कि आखिरकार ऐ ‘पंचनिष्ठा’ क्या है, जिसमें पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं के साथ विकासशील दृष्टिवानों को समाहित करने का प्रयास शुभारंभित हो रहा है। फिलहाल भदोही जनपद जिलाध्यक्ष पदस्थ ‘पंचनिष्ठा’ कथावाचक विनय श्रीवास्तव की महफिल में जहाँ भाजपाईयों की ऊर्जावान चहल-पहल है, वहीं स्वार्थी, भ्रष्टाचारी-दलाल व व्यापारी भी कतारबद्ध होकर शिष्टाचार भेंट के माध्यम से शुभकामनायें दे रहे हैं। हालाकि ‘पंचनिष्ठा’ सिद्धांतों का प्रसाद एक समान हर किसी को बट रहा है, जैसे कि ‘सत्य नारायण’ कथा के बाद ‘पंचामृत’।
प्रेरणाश्रोत पंचनिष्ठा – भाजपा की विचारधारा स्पष्ट एवम् अडिग है। कुछ महीनों से ‘पंचनिष्ठा’ पर दिग्गज नेताओं ने प्रकाश डालने की ‘कथनी मुहिम’ छेड़ रखा है, जबकि उक्त ‘पंचनिष्ठा’ सिर्फ पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं हेतु नहीं है बल्कि उसका पालन ‘फर्श’ से ‘अर्श’ तक होने पर ही स्वस्थ लोकतंत्र की परिकल्पना के सार्वजनिक विकास कार्य पथमय की जा सकती है। लेखकों-विश्लेषकों की फौज भी ‘पंचनिष्ठा’ के ‘विश्लेषण’ से जुड़ी है। ऐसे में ‘सत्य नारायण’ कथा उपरांत ‘पंचामृत’ से धन्य होने वाले भाजपाईंयों को अब ‘पंचनिष्ठा कथा’ पढ़ना और सुनना पड़ेगा। फिलहाल ‘कथनी’ व ‘करनी’ के सफल गठबंधन प्रयोग से विधायक-सांसद ही भ्रष्टाचार मुक्त विकास कार्य जमीं पर उतारकर भाजपा संगठन पदाधिकारियों का सम्मान लौटा सकते हैं, जिन्हें गांव-समाज से वोटरूपी समर्थन दिलवाकर भाजपाईयों व समर्थकों ने जीत दिलाया है।
एक सुप्रसिद्ध प्रोफेसर व भाजपाई विचारधारा के लेखक लिखते हैं कि ‘प्रेरणाश्रोत पार्टी संविधान’ में उल्लेखनीय ‘पंचनिष्ठा’ का मुख्य बिंदू इस प्रकार है…
राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय एकता लोकतंत्र
गांधीवादी दृष्टिकोण पर आधारित
समतामूलक समाज की स्थापना
सकारात्मक पंथनिरपेक्षता
मूल्य (सिद्धांत) आधारित राजनीति
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