महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के इस्तीफे के बाद कुछ समय बाद ही सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी मंगलवार दोपहर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राजभवन द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक फडणवीस ने राज्यपाल से भेंट की और अपना इस्तीफा सौंपा। बता दें कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शपथ लेने के 80 घंटे बाद मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के लिए अजित पवार ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने दावा किया कि शक्ति परीक्षण के दौरान शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के महा विकास आघाडी के पास 170 विधायकों का समर्थन होगा।
हमारे पास बहुमत नहीं: फडणवीस
संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अजित पवार के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद उनके पास संख्या बल नहीं रह गया है और वह राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौपेंगे। अजित पवार ने पिछले सप्ताह ही भाजपा के खेमे में आकर शनिवार सुबह फडणवीस के साथ शपथ ली थी। फडणवीस ने कहा कि सुबह अजित पवार उनसे मिले थे और उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा था। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री पद से अजित पवार के इस्तीफे के बाद हमारे पास बहुमत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें महसूस हुआ कि हमारे पास संख्या बल नहीं है और हम खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं होना चाहते इसलिये यह फैसला किया। फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं होगी और जवाबदेह विपक्ष के तौर पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष के रूप में जनता की आवाज बनेगी। फडणवीस के इस्तीफे का स्वागत करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से अनुरोध किया कि वह फडणवीस का इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन के नेता उद्धव ठाकरे को सरकार बनाने के लिये आमंत्रित करें।
इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा था कि अजित पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राउत ने कहा अजित दादा ने इस्तीफा दे दिया है और अब वह हमारे साथ हैं। उद्धव ठाकरे अब अगले पांच वर्ष तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे। महाराष्ट्र में गत शनिवार सुबह आठ बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने यहां राजभवन में फडणवीस और पवार को क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई थी। राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस ने शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसके बाद आज मंगलवार को न्यायालय ने फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को बुधवार पांच बजे तक शक्ति प्रदर्शन करने का निर्देश दिया था। इस बीच, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 162 विधायकों का समर्थन है और ऐसे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शक्ति परीक्षण के दौरान शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के महा विकास आघाडी के पास 170 विधायकों का समर्थन होगा।
महाराष्ट्र संकट : न्यायालय ने पहले के फैसलों को ही आधार….
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को विधानसभा में बुधवार की शाम तक बहुमत सिद्ध करने का निर्देश देने संबंधी आदेश में उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक से लेकर झारखंड विधान सभा तक में उत्पन्न ऐसे ही राजनीतिक संकटों में शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला दिया। इन राज्यों में भी राजनीतिक संकट पैदा होने पर न्यायालय ने सदन में ही बहुमत सिद्ध करने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में सबसे पहले कर्नाटक विधानसभा के 17 सदस्यों को अयोग्य ठहराने के अध्यक्ष के निर्णय को सही ठहराने संबंधी अपने 13 नवंबर के फैसले का हवाला दिया है। न्यायमूर्ति रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कर्नाटक प्रकरण में अयोग्य घोषित विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले में न्यायालय ने संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की संवैधानिक नैतिकता बनाये रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। शीर्ष अदालत ने इसी तरह उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के मामले में अपने 2016 के निर्णय का हवाला दिया। इस मामले में न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत को सदन में विश्वास मत हासिल करने का आदेश दिया था। राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केन्द्र सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। यह फैसला उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ, जो इस समय उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश हैं, की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया था।
सदन में ही शक्ति परीक्षण-शीर्ष अदालत ने राज्य विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने और उसमें हरीश रावत को विश्वास मत प्राप्त का आदेश दिया था। न्यायालय ने कहा था कि इस सत्र की कार्यसूची का एकमात्र विषय विश्वास मत ही होगा और किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी। न्यायालय ने सदन में विश्वास मत प्राप्त करने की कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग करने ओर इसे शीर्ष अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। इसी तरह, शीर्ष अदालत ने कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को शाम चार बजे तक विश्वास मत हासिल करने का आदेश देने संबंधी अपने 18 मई, 2018 के फैसले का भी हवाला दिया है। न्यायालय ने कहा था कि यह पता लगाने के लिये कि क्या येदियुरप्पा को बहुमत प्राप्त है या नहीं, सदन में शक्ति परीक्षण करना होगा। इन सभी फैसलों का मुख्य आधार 1994 में कर्नाटक के एस आर बोम्मई प्रकरण में शीर्ष अदालत की नौ सदस्यीय संविधान पीठ की व्यवस्था है जिसमें न्यायालय ने कहा था कि जब भी यह सवाल उठे कि क्या मंत्रिपरिषद् सदन का विश्वास खो चुकी है तो इसका एकमात्र तरीका सदन में ही शक्ति परीक्षण है। संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना असंवैधानिक है क्योंकि राज्यपाल ने ऐसा करने से पहले सदन में शक्ति परीक्षण के माध्यम से बहुमत साबित करने का अवसर प्रदान नहीं किया था। इसी तरह, न्यायालय ने 1999 के बहुचर्चित जगदम्बिका पाल बनाम भारत सरकार प्रकरण का भी हवाला दिया जिसमें शीर्ष अदालत ने उप्र विधानसभा में समेकित शक्ति परीक्षण का आदेश दिया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि राज्यपाल रोमेश भण्डारी द्वारा मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किये गये कल्याण सिंह के पास बहुमत है या फिर उनके उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त कांग्रेस के जगदम्बिका पाल के पास बहुमत है। इसी तरह की स्थिति छह साल झारखंड विधान सभा में 2005 में पैदा हुयी और एक बार फिर शीर्ष अदालत ने मार्च 2005 में सदन में ही शक्ति परीक्षण का आदेश दिया था ताकि यह पता लग सके कि अर्जुन मुण्डा या शिबू सोरेन में से किसके पास बहुमत है।
अजित का भी इस्तिफा – महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शपथ लेने के 80 घंटे बाद मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के लिए अजित पवार ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने दावा किया कि शक्ति परीक्षण के दौरान शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के महा विकास आघाडी के पास 170 विधायकों का समर्थन होगा।
सर्वोच्च न्यायालय से आखिरी झटका – मंगलवार जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो रही थी तो सभी पक्षकारों की धड़कनें बढ़ी हुई थीं. अदालत ने साफ-साफ शब्दों में फैसला देते हुए कहा कि फडणवीस सरकार को 30 घंटे के अंदर बहुमत हासिल करना होगा, विश्वासमत का लाइव प्रसारण किया जाएगा, साथ ही मतदान की प्रक्रिया गुप्त नहीं रहेगी. अदालत से कोई राहत न मिलने के बाद देवेंद्र फडणवीस के सामने सभी दरवाजे बंद हो गए. इस फैसले के कुछ ही घंटे बाद डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया. (साभार ‘प्रवासी संदेश)


