राजनीति के केंद्र में पौधारूपी भाजपा भले ही वटवृक्ष की भूमिका में है लेकिन इस वटवृक्ष की छांव में इसे वर्षो सींचने वाला मालियों का परिवार ही सेवाभावी कर्मठता के बावजूद कतार में खड़ा नजर आ रहा है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि भदोही जनपद के भाजपा संगठन चुनाव से ऐसी ही तस्वीर झलक रही है। महादेव की नगरी ‘काशी’ की बेटी व ‘काशी-प्रयाग मध्य’ भदोही की बहू के कर्मठता व बैकग्राउंड पर आधारित पढ़िये.. हमारी संवाददाता अंजू त्रिपाठी की ऐ रिपोर्ट..✍️
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के भाजपा संगठन चुनाव में इन दिनों भदोही जनपद से लोकतांत्रिक पथमय कई कहानियाँ छनकर सामने आ रही है। पुरूष प्रधान राजनीति में महिलाओं पर मंथन करने हेतु जो जज्बा चाहिये, शायद वो भाजपा संगठन में नजर नहीं आ रहा है। भदोही जनपद जिलाध्यक्ष पद हेतु पर्चा भरने वाली ऋचा सिंह (मृदुला सिंह) को शायद बहुत कम लोग जानते होगें क्योंकि ५५ उमीद्वारों की सुची मीडिया में जारी नहीं हुई है। 5 मार्च 1977 को जन्म लेने वाली ऋचा सिंह ने एम. ए. (आचार्य) शोध की शिक्षा को पूर्ण किया, जोकि भदोही जनपद के बघेल छावनी, सिद्धपीठ, हरिगांव की रहने वाली हैं। फिलहाल भदोही भाजपा जिलाध्यक्ष ५५ प्रत्याशियों की सुची बतौर महिला नेत्री सर्वश्रेष्ठ चर्चा में है। महिला नेत्री के पिता रामअधार सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, उन्हें “मीसा” लगी थी तथा जनसंघ से भाजपा तक राष्ट्र को समर्पित रहे। चाचा रवीन्द्र प्रताप सिंह 1977 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन संजय गांधी को हराकर विजयी हुये थे।
नाना भी दानवीर – महिला नेत्री ऋचा सिंह के नाना तत्कालीन प्रेम बहादुर सिंह ‘दानवीर’ की उपाधी से सुशोभित हुये थे, जिन्होनें शिक्षा के क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि का दान करते हुये सुर्यवंशम् गौरवान्वित किया था। शैक्षणिक रक्तबीज की प्रतिभा को महिला नेत्री ऋचा सिंह ने ससुराल में भी निभाया। ‘श्री इन्द्रबहादुर सिंह नेशनल इण्टर कालेज भदोही’ व ‘श्री प्रेम बहादुर सिंह पब्लिक स्कूल भदोही’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण।
भदोही मार्तण्ड – समाज सेवा में निरन्तर महिला सशक्तिकरण का एहसास करवाने वाली ऋचा सिंह के स्व. अजित सिंह बघेल भदोही के मार्तण्ड के रूप में जाने जाते रहें। आज भले ही वे तनरूपी नहीं हैं लेकिन भारतीय संस्कृति एवं शैक्षणिक-सांस्कृतिक पथ उनकी कर्तव्यनिष्ठता का उत्कर्ष बिन्दु दर्पण है।

ऋचा सिंह कहती हैं..देश के प्रमुख धार्मिक संगठनों एवं संस्थानों के साथ धार्मिक क्रांति को बढ़ाने का कार्य करती रही हूं, समाज के उत्थान में सदैव अग्रसर हूं। धर्मांतरण से अपने हिंदुत्व की रक्षा के साथ वनवासियों के अधिकारों के प्रति सजगता व निर्धन असहाय परिवारों को शिक्षा तथा विवाह में सहयोग सिद्धपीठ के माध्यम से प्रदान करने की दृढ़ संकल्पपूर्ति जारी है। भारतीय जनता पार्टा में 1996 से सक्रियता के साथ समर्पित भाव से कार्यरत हूं तथा भदोही जनपद में मैं पिछले कार्यकाल में जिला उपाध्यक्ष के पद पर रही हूँ। विश्व हिन्दु सेवा संघ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी व राष्ट्रीय मानवाघिकार संगठन में प्रदेश संगठन मंत्री की भूमिका निभाने का भी सौभाग्य मिला। भदोही जनपद में एकमात्र महिला साहित्यकार के रूप जब गौरान्वित होती हूँ तो महिलाओं के शीर्ष नेतृत्व व आदर्श ही हमारे लिये दर्पण हैं।
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