मुंबई (सं. भा.) कांदिवली पश्चिम, लिंक रोड लालजी पाड़ा की ओर आने वाली पोइसर नदी के चौड़ीकरण के नाम पर लोगों के शिफ्टिंग किए जाने के तहत बड़े पैमाने पर मनपा अधिकारियों के द्वारा झोल किए जाने की बात सामने आई है। इस बारे में लगातार शिकायत किए जाने के बावजूद मनपा अधिकारी बेपरवाह बने हुए है। इस मामले में मनपा अधिकारियों के इस रवैए के खिलाफ परिवर्तन फाउंडेशन जल्द ही कोर्ट में जनहित याचिका (पी आई एल) दायर करेगी। ऐसी जानकारी फाउंडेशन के राष्ट्रिय अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी ने दी है।
बता दे कि २६ जुलाई २००५ को मुंबई में हुई तेज बरसात के कारण बाढ़ आई थी। तब मीठी नदी सहित मुंबई के सभी नदियों के किनारे अवैध रूप से बने घरो या झोपड़ों को मनपा ने तोड़ दिए थे। यह सभी झोपड़े नदी को पाट कर वहां बनाए गए थे। बोरीवली के नेशनल पार्क से बह कर कांदिवली पश्चिम के लालजी पाड़ा तक आने वाली पोइसर नदी के किनारे बने झोपड़ो को भी २००५ में बाढ़ के बाद तोड़ कर वहां रहने वालों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। अब मनपा आर दक्षिण के अधिकारियों पर सवाल यह उठता है कि अगर २००५ में जब पोइसर नदी के चौड़ीकरण के नाम पर वहां बने झोपड़ों को तोड़ दिए गए थे तब दोबारा वहां झोपड़े बने कैसे ?
२०१८ में मनपा आर दक्षिण विभाग कार्यालय द्वारा पोइसर नदी के चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया। इस के नाम पर वहां झोपड़ो को फिर से तोड़ा गया। अब स्थानीय नगरसेवक के मिलीभगत से शौचालय व एक का डबल रूम बना कर वहा अवैध तरिके से शिफ्टिंग कर उन्हें पात्र किया जा रहा है। इस फर्जीवाड़े के शिकायत क्षेत्र के दर्जनों लोगों और संस्थानों द्वारा किया गया है परंतु आर्थिक दबाव में मनपा अधिकारी इतना दब चुके है की वे इन शिकायतों कि ओर ध्यान तक नहीं दे रहे है।
इतना ही नहीं बिना किसी जाँच पड़ताल के स्थानीय नगरसेवक के ८ लोगो को वहां मनपा के द्वारा घरों की चाबियां भी सुपुर्द कर दी गई हैं। बड़े पैमाने पर किये गए इस गड़बड़ झाले की ओर से पूरी तरह आंख मूंदने वाले मनपा अधिकारियों को निंद से जगाने और उचित कार्रवाई करने को लेकर हीं `परिवर्तन फाउंडेशन’ एक जनहित याचिका दायर करने को लेकर कोर्ट का रुख अख्तियार करने जा रहा है। जिसके बाकायदा मनपा आयुक्त, सहित सभी विभागों को नोटिस दिया गया है।


