मुंबई (सं.भा.) २४ घंटे बिजली की चमक से रौशन मुंबई से सटे गोराई गांव में बसे आदिवासियो का जाम झाड़ पाड़ा अब तक रोशनी से दूर था आजादी के ७१ साल बाद शुक्र्वार को यहां बिजली पहुंची और हर घर बिजली के दीपो से जगमगा उठा पांरपरिक वाद्ध बजाकर आदिवासियो ने बिजली का स्वागत किया डेढ़ वर्षो अथक प्रयास के बाद यहाँ बिजली पहुंचने या से आदिवासियो की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा है
आजादी के ७१ साल बाद पहुंची बिजली
भाईंदर से समीप गोराई मार्ग से तीन किमी अंदर एक छोटी सी पहाड़ी के पास मौजूद जामझाड बस्ती में करीबन दो सौ लोग रहते है देश की आर्थिक राजधानी से सटे हुए इस आदिवासी इलाके में आज भी पानी बिजली शिक्षा अस्पताल जेसी मुलभूत सुविधाए नहीं है
इस इलाके के मोठी डोंगरी मुंड़ा बाबर पाडा ,बोरकापाड़ा जैसी आदिवासी इलाके में २००३ में बिजली आ गयी थी लेकिन जामझाड पाड़ा को फिर भी बिजली नसीब नहीं हुई चुनाव आने पर बिजली, पानी जैसी सुविधाए देने का आश्र्वसन राजनैतिक पार्टियों द्वारा लोगो को दिया जाता था चुनाव आते -जाते गए लेकिन यहां बिजली नहीं आयी
पढ़ाई के लिए गोराई या मनोरी गांव में जाना पडता है जिसके लिए यहां से ३ किलोमीटर पैदल और उसके बाद अगर मिला तो वाहन से स्कूल का रास्ता तय होता कोई बीमार पड़ा गया तो इलाज के लिए भी या गोराई या उन्नत गांव में जाना पड़ता है मजदुरी कर यहां के आदिवासी अपना जीवन यापन करते है तो कभी किसी को रोजगार मिलता है तो कभी किसी को नहीं.


