हे ‘निषादराज’…कलयुगी ‘भाई’ की ‘वजह’ से ‘ठोकर’ खाने पर ‘विवश’ है ‘राजकुमार’….
समाज में यदि भाइयों के प्रेम की चर्चा होती है तो लोग राम और भरत के भातृत्व प्रेम का उदाहरण देते है लेकिन भूल जाते हैं कि यह कलयुग है…आज ऐसे भी भाई है जो अपने स्वार्थ और लाभ के चक्कर में भाइयों से प्रेम नही बल्कि दुश्मनी करने से नही चुकते है। जगह-जमीन विवाद…


